स्मोक फ्री के बाद कचरा मुक्त शहर बना शिमला, एमसी ने की घोषणा
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आयुक्त पंकज राय ने बताया कि इस दावे पर शहरवासियों की आपत्तियां मांगी थीं लेकिन एक भी आपत्ति नहीं आई। ऐसे में शहर को गारबेज फ्री सिटी घोषित किया जा सकता है। इससे स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में भी शहर को बेहतर अंक मिलेंगे।
हालांकि, इस दौरान विकासनगर पार्षद रचना ने सवाल भी उठाए। कहा कि उनके वार्ड में सैकड़ों घरों से कचरा नहीं उठ रहा। जंगल और नाले कचरे से भरे पड़े हैं। कुछ पार्षदों ने कहा कि डिप्टी मेयर के वार्ड के भी यही हाल है। आयुक्त ने कहा कि इस रविवार इलाके का दौरा करेंगे।
अब पार्षद भी लगा सकेंगे पैनल्टी
सदन में फैसला लिया गया कि शहर में चल रहे 110 सार्वजनिक शौचालयों के दोबारा टेंडर किए जाएंगे। इसमें जो भी कंपनी जिम्मा संभालेगी, उसे शौचालयों में विज्ञापन लगाने की छूट होगी। सैहबकर्मियों के लिए जूते और ड्रेस खरीदने के लिए कमेटी बनाई गई।
इसमें पार्षद शैली शर्मा, दिवाकर शर्मा, बिट्टू कुमार, इंद्रजीत सिंह और शारदा चौहान को शामिल किया है। ओडीएफ प्लस प्लस को मंजूरी दी गई। पार्षद आरती चौहान ने कहा कि कूड़ा न देने वालों का बिजली-पानी काटा जाए।
कर्मचारी होने के बावजूद ये लोग कूड़ा जंगल में फेंक रहे हैं जिससे गंदगी बढ़ रही है। विशेष सदन में मेयर-डिप्टी मेयर समेत सिर्फ 18 पार्षद ही पहुंचे थे।नगर निगम के पार्षद अपने अपने वार्ड में शौचालय की सफाई व्यवस्था चेक करेंगे।
इस दौरान यदि व्यवस्था ठीक नहीं मिलती है तो पार्षद एक हजार रुपये की पैनल्टी संचालक को लगा सकेंगे। पार्षदों को जुर्माना लगाने की शक्तियां देने पर भी सदन ने सहमति जताई।