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तीन तलाक के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली सायरा ने कहा- मोदी सरकार ने मुस्लिम महिलाओं को दिलाया न्याय

Sun, 14 Oct 2018 12:01 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कसौली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कसौली Updated Sun, 14 Oct 2018 12:01 PM IST
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Shayara Banu fight against triple talaq, said- Modi government gave justice to Muslim women
सायरा बानो

ट्रिपल तलाक पर पाबंदी और कानून बनाने में केंद्र सरकार की अहम भूमिका रही है। मुस्लिम महिलाओं के हित सुरक्षित हुए हैं। केंद्र सरकार तीन तलाक पर गंभीरता नहीं दिखाती तो शायद कभी यह कानून नहीं बन पाता। पूर्व की सरकारें कभी ट्रिपल तलाक जैसे मसले पर गंभीर नहीं रहीं। अब ट्रिपल तलाक पर बने कानून को पूरे देश में लागू करने की जरूरत है। इसमें पुलिस और स्थानीय प्रशासन को अपनी निष्पक्ष भूमिका निभानी होगी। यह बात तीन तलाक के खिलाफ महिलाओं के हित को लेकर लड़ाई लड़ने वाली सायरा बानो ने कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट के दौरान कही। 

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उन्होंने कहा कि उनकी अगली जंग हलाला के खिलाफ है। मुस्लिम समाज में हलाला पर प्रतिबंध लगना चाहिए। मुस्लिम समाज में महिलाएं शिक्षित नहीं हैं। इसी वजह से उनका शोषण ज्यादा हो रहा है। हलाला पर प्रतिबंध के लिए पूरे देश को एकजुट करने की जरूरत है। इस विषय पर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार बड़ा कदम उठा सकती है। मुस्लिम महिलाओं के हित सुरक्षित करने में सरकार के प्रयासों को भविष्य में पूरे समाज को फायदा मिलेगा।
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उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक पर कानून बनने के बावजूद यह पूरी तरह से रुके नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस कानून को सख्ती से लागू करवाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि देश में कोई भी व्यक्ति ट्रिपल तलाक देता है तो कानून के तहत उसे कम से कम तीन साल की सजा हो सकती है। इसका डर लोगों को दिखाना होगा, ताकि मुस्लिम समाज में महिलाएं सुरक्षित महसूस कर सकें।

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ट्रिपल तलाक केस के चर्चित चेहरे को नहीं पहचान पाए आयोजक, गेट पर रोका

Shayara Banu fight against triple talaq, said- Modi government gave justice to Muslim women

ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज बुलंद कर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने वाली मुस्लिम महिला को कसौली लिटफेस्ट में शामिल होने के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। उत्तराखंड से सायरा बानो को आयोजकों ने वक्तव्य के लिए बुलाया था। लेकिन गेट पर तैनात स्टाफ उन्हें पहचान नहीं पाया। ऐसे में वह लौटने को थीं, लेकिन कुछ देर बाद पहचान होने पर उन्हें भीतर बुला लिया गया। सायरा बानो अपने पिता इकबाल के साथ आई थीं। उन्हें ट्रिपल तलाक मामले पर बोलने के लिए कसौली में खुशवंत सिंह लिटफेस्ट में बुलाया गया था।

सायरा जैसे ही गेट पर पहुंचीं तो उन्हें गेट पर तैनात आयोजन के स्वयंसेवियों ने अंदर जाने से रोक दिया। उन्हें बताया गया कि उनका नाम एंट्री रजिस्टर में नहीं है। लिहाजा वह भीतर नहीं जा सकतीं। बाद में मीडिया कर्मियों ने सायरा की पहचान से स्वयंसेवियों को अवगत कराया। सायरा बानो ने बताया कि उन्हें उत्तराखंड से यहां ट्रिपल तलाक पर वक्तव्य देने के लिए बुलाया गया है।

वे 11 अक्तूबर से यहां निजी होटल में रह रही हैं। उन्होंने कई बार संपर्क साधने की कोशिश की, लेकिन उनसे किसी ने बात नहीं की और अब उन्हें गेट पर रोक दिया गया। ऐसे में परेशान होकर वह बिना वक्तव्य के ही वापस जाने वाली थीं। वहीं गेट ड्यूटी पर महिला स्वयंसेवक ने कहा कि बहुत से लोग वक्तव्य देने पहुंचे हैं और वे हर किसी को नहीं पहचान सकती हैं। पहचान दिखाने पर सायरा बानो को अंदर जाने की इजाजत दे दी गई थी।  

स्पीड पोस्ट से भेजा था पति ने तलाक  
सायरा बानो की शादी 2001 में इलाहाबाद में हुई थी। उनके शादी के बाद दो बच्चे हैं। दहेज उत्पीड़न के चलते उनके पति ने स्पीड पोस्ट के माध्यम से उन्हें तलाक भेजा था। जिसके बाद वे इसके खिलाफ कानूनी लड़ाई के लिए कोर्ट चली गई।

सायरा बानो के अनुसार इस दौरान उन्हें मुस्लिम धर्म गुरुओं ने पथभ्रष्ट की संज्ञा दी, उन पर समझौते के लिए भी दबाव बनाया गया। लेकिन वे अपने निर्णय पर अडिग रही। सायरा बानो का कहना है कि ट्रिपल तलाक के बाद महिला को हलाला से गुजरना पड़ता है अब उनकी अगली लड़ाई इसके खिलाफ होगी।

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