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शांता बोले- स्वदेशी कंपनियों को लाइसेंस दिया होता तो करोड़ों को लग चुकी होती वैक्सीन
Sat, 24 Jul 2021 10:10 PM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
अमर उजाला नेटवर्क, पालमपुर (कांगड़ा)
Published by: Krishan Singh
Updated Sat, 24 Jul 2021 10:10 PM IST
सार
भारत सरकार ने कंपलसरी लाइसेंस दिया और वही दवाई खुले में अधिक मात्र में मिलने लगी और केवल आठ हजार 800 रुपये में बिकने लगी। विदेशी कंपनियां पेटेंट के नाम पर आम आदमी को लूटती हैं।
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पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने कहा कि उन्होंने 21 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुसार भी सरकार आपातकाल में कंपलसरी लाइसेंस दे सकती है। पत्र के बाद 10 स्वदेशी कंपनियों को टीका बनाने का कंपलसरी लाइसेंस दिया होता तो आज करोड़ों टीके बनते और करोड़ों और लोगों को टीका लग गया होता। कहा कि अब संसद की कॉमर्स पर स्थायी समिति ने अपनी रिपोर्ट देकर भारत सरकार से कहा है कि कोविड टीका बनाने के लिए सरकार पेटेंट की बाधा से निकलकर भारत की स्वदेशी कंपनियों को कंपलसरी लाइसेंस दे और अधिक संख्या में टीका बनाए।
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कमेटी ने रिपोर्ट में कहा है कि भारत सरकार ने एक बार पहले भी मैक्साबार नाम दवाई बनाने के लिए कंपलसरी लाइसेंस दिया था। स्थायी समिति ने जिसका जिक्र किया है, उस संबंध में इसी कॉमर्स पर स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में 2011-12 में मैंने सरकार को रिपोर्ट दी थी। यह कहा था कि कैंसर की एक दवाई दो लाख 80 हजार रुपये में विदेशी कंपनी बेचती थी। भारत सरकार ने कंपलसरी लाइसेंस दिया और वही दवाई खुले में अधिक मात्र में मिलने लगी और केवल आठ हजार 800 रुपये में बिकने लगी। विदेशी कंपनियां पेटेंट के नाम पर आम आदमी को लूटती हैं। उनके वक्तव्य के बाद यही बात केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कही थी।
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