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हिमाचल के 11 शहरों में पीपीपी मोड में बनेंगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
Updated Sat, 13 Oct 2018 01:17 PM IST
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राज्य सरकार हिमाचल के 11 शहरों में पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और सीवरेज प्रणाली उपलब्ध कराएगी। सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए निजी कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित कर रही है, ताकि शहरों की मल निकासी व्यवस्था में सुधार हो। इससे पहले प्रदेश के 51 शहरों में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य (आईपीएच) विभाग एसटीपी तैयार कर चुका है।
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इनमें शिमला के पांच एसटीपी भी आईपीएच ने वर्ष 1998 में ओपेक की वित्तीय मदद से तैयार किए थे। प्रदेश सरकार ने जिन 11 शहरों में पीपीपी मोड में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने हैं, उनमें राजगढ़, नेरचौक, बैजनाथ-पपरोला, ज्वाली, करसोग, भोटा, बंजार, दौलतपुर चौक, टाहलीवाल, चौपाल और नाहन शामिल हैं।
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इन शहरों में एसटीपी स्थापित करने के लिए फर्मों के चयन का जिम्मा सरकार ने एक सरकारी एजेंसी को सौंपा है। यही एजेंसी पीपीपी मोड के तहत संबंधित प्रोजेक्ट तैयार करने वाली फर्मों से निविदाएं भी आमंत्रित करेगी। इसके बाद जिन फ र्मों की निविदाएं मंजूर होंगी, उनको उक्त 11 शहरों से एसटीपी और सीवरेज लाइन बिछाने का काम सौंपा जाएगा।
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तीन एमएलडी क्षमता का होता है एसटीपी
11 शहरों में पीपीपी मोड में स्थापित होने वाले एसटीपी को जनसंख्या के आधार पर स्थापित किया जात है। मापदंडों के अनुसार 25 हजार की आबादी के लिए करीब 2 या 3 एमएलडी क्षमता का एसटीपी स्थापित करना पड़ता है।
प्रदेश के 131 शहरों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और सीवरेज प्रणाली पीपीपी मोड के तहत तैयार की जा रही है। सरकार ने नोडल एजेंसी को कंपनी के चयन का जिम्मा सौंपा है। - सुमन विक्रांत, कार्यवाहक इंजीनियर इन चीफ, आईपीएच विभाग
मंजूरी लेने के लिए केंद्र को भेजा औद्योगिक क्षेत्रों के ईटीपी मामला
पर्यावरण मंजूरी को दो औद्योगिक क्षेत्रों कंदरोड़ी और पंडोगा के एफ्लूएंड ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) के मामले भेजे गए हैं। जब तक केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से दोनों ईटीपी को मंजूरी नहीं मिलेगी, तब तक बड़े उद्योगों को स्थापित करने में बाधा रहेगी। दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में बड़े निवेशकों ने पूंजी उद्योग स्थापित करने के लिए पूंजी निवेश करनी है।
वर्तमान में कंदरोड़ी में 3 एमएलडी और पंडोगा में दो एमएलडी क्षमता के ईटीपी की स्थापना की जानी है। कंदरोड़ी में करीब 1300 कनाल और पंडोगा में एक हजार कनाल क्षेत्र में नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में माडल इंडस्ट्रियल एरिया के रूप में विकसित किया जा रहा है। कॉमन सुविधा केंद्र स्थापित किया जा चुके हैं। नौकरीपेशा महिला हॉस्टल भी बनकर तैयार हो चुका है।
दोनों औद्योगिक क्षेत्रों में गिनती के प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं। जब तक एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगेंगे, तब तक उद्योगों को प्लाट आवंटन में बाधा बनी हुई है। इन उद्योगों को स्थापित करने के लिए ईटीपी अनिवार्य हैं। ये ईटीपी लगने के साथ ही पूंजीपति निवेश करने की स्थिति में रहेंगे।
लघु उद्योग विकास निगम के प्रबंध निदेशक कैप्टन जेएम पठानिया ने कहा कि कंदरोड़ी और पंडोगा औद्योगिक क्षेत्रों में ईटीपी स्थापित करने का मामला पर्यावरण मंजूरी को भेजा है। मंजूरी मिलने के बाद प्लांट लगाने का रास्ता साफ होगा।
दोनों औद्योगिक क्षेत्र में 155 करोड़ से लगने हैं ईटीपी
कंदरोड़ी और पंडोगा में 155 करोड़ से एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) स्थापित किए जाने हैं। कंदरोड़ी में 68 करोड़ और पंडोगा में 87 करोड़ से ईटीपी स्थापित होने हैं। ये प्लांट लगाने को केंद्र से पर्यावरण मंजूरी को भेजे हैं।