{"_id":"5ce3d5a5bdec2207801a6ad7","slug":"serious-allegations-of-fraud-in-the-phd-admission-of-hpu-shimla","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"पीएचडी प्रवेश में गड़बड़झाला, नियमों को दरकिनार कर चेहतों को दाखिला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीएचडी प्रवेश में गड़बड़झाला, नियमों को दरकिनार कर चेहतों को दाखिला
Tue, 21 May 2019 07:57 PM IST
Krishan Singh
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 21 May 2019 07:57 PM IST
विज्ञापन
- फोटो : अमर उजाला
एचपीयू में यूजीसी नियमों को दरकिनार कर चहेतों को पीएचडी में प्रवेश देने का खुलासा हुआ है। विश्वविद्यालय के रिसर्च स्कालर्स ने आरटीआई से जुटाई जानकारी के माध्यम से यह आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन
छह मामलों पर विवि प्रबंधन को कठघरे में खड़ा किया है। पत्रकारों से बातचीत में शोधार्थी संघ के सचिव नोबल ठाकुर, उपाध्यक्ष अनिल नेगी ने कहा कि अधिकतर मामले एमसीए के हैं।
विज्ञापन
जिसमें डीएस स्वयं शिक्षक हैं। इस दौरान करीब दो वर्ष पूर्व उठाए गए वाणिज्य विभाग में दर्शन निष्णांत में पीएचडी की थीसिस मात्र 11 महीने में जमा करवाने का मामला उठाया।
विज्ञापन
इसे उन्होंने विवि आर्डिनेंस 16.13 की अनदेखी करार दिया। पीएचडी थीसिस की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष तय है। इसे दरकिनार किया गया। मामला गरमाने के बावजूद आज तक इस मामले के जिम्मेदार डीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
Trending Videos
ये सवाल भी उठाए
दूसरे मामले में उन्होंने विवि के डीएस पर एमसीए विभाग में पीएचडी में शिक्षक कोटे की सीट में एक निजी कॉलेज की शिक्षिका को प्रवेश देने को भी नियमों की अनदेखी करार दिया। ऐसे पद विज्ञापित किए जाते हैं।
आवेदन आने पर प्रवेश परीक्षा या मेरिट आधार पर प्रवेश दिया जाता है। वरिष्ठता पर सरकारी संस्थान के शिक्षक को प्रवेश दिया जाता है। ऐसा कुछ नहीं किया गया।
वहीं, कंप्यूटर साइंस विभाग में ही डीएस की अनुमति से महाविद्यालय में ही पढ़ने वाले एक व्यक्ति को पास्ट प्रैक्टिस के आधार पर पीएचडी में टीचर कोटे से प्रवेश की अनुमति देने के मामले पर भी सवाल खड़े किए।
एमसीए विभाग में ही स्नातक डिग्री में गणित को विषय के रूप में पढ़े होने की शर्त के बावजूद नियमों को दरकिनार कर कॉमर्स पढ़े छात्र को एमसीए में प्रवेश दे दिया। शोध छात्रों ने कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रमुख के पीएचडी में पंजीकरण करने पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि उनकी पीएचडी में एनरोलमेंट 18 अप्रैल 2007 में इन्हीं वर्तमान डीएस के अधीन होती है। जबकि उनकी एमएससी कंप्यूटर साइंस जून 2008 में पूरी हुई है। यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
विश्वविद्यालय के डीएस प्रो. अरविंद कालिया ने कहा कि उनके डीएस कार्यकाल में जो भी पीएचडी में प्रवेश हुए हैं, वह नियमों में हुए हैं। यदि कहीं गड़बड़ी है तो इसकी जांच की जाएगी।
आवेदन आने पर प्रवेश परीक्षा या मेरिट आधार पर प्रवेश दिया जाता है। वरिष्ठता पर सरकारी संस्थान के शिक्षक को प्रवेश दिया जाता है। ऐसा कुछ नहीं किया गया।
वहीं, कंप्यूटर साइंस विभाग में ही डीएस की अनुमति से महाविद्यालय में ही पढ़ने वाले एक व्यक्ति को पास्ट प्रैक्टिस के आधार पर पीएचडी में टीचर कोटे से प्रवेश की अनुमति देने के मामले पर भी सवाल खड़े किए।
एमसीए विभाग में ही स्नातक डिग्री में गणित को विषय के रूप में पढ़े होने की शर्त के बावजूद नियमों को दरकिनार कर कॉमर्स पढ़े छात्र को एमसीए में प्रवेश दे दिया। शोध छात्रों ने कंप्यूटर साइंस विभाग के प्रमुख के पीएचडी में पंजीकरण करने पर भी सवाल खड़े किए।
उन्होंने कहा कि उनकी पीएचडी में एनरोलमेंट 18 अप्रैल 2007 में इन्हीं वर्तमान डीएस के अधीन होती है। जबकि उनकी एमएससी कंप्यूटर साइंस जून 2008 में पूरी हुई है। यह अपने आप में बड़ा सवाल है।
विश्वविद्यालय के डीएस प्रो. अरविंद कालिया ने कहा कि उनके डीएस कार्यकाल में जो भी पीएचडी में प्रवेश हुए हैं, वह नियमों में हुए हैं। यदि कहीं गड़बड़ी है तो इसकी जांच की जाएगी।