धारा 118 मामला: विजिलेंस ने शुरू किया हार्ड डिस्क के डाटा का विश्लेषण
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरी देने में हुए कथित भ्रष्टाचार मामले की जांच कर ही विजिलेंस ने छानबीन और तेज कर दी है। जांच एजेंसी ने पूर्व डीजीपी आईडी भंडारी के खिलाफ कथित गैर कानूनी फोन टैपिंग मामले की हार्ड डिस्क के डाटा का विश्लेषण शुरू कर दिया है।
इसमें पूर्व प्रमुख सचिव राजस्व व वर्तमान राज्य चुनाव आयुक्त पार्थ सारथी मित्रा के आवाज के सैंपल मौजूद हैं। ऐसे में विजिलेंस हार्ड डिस्क के डाटा का आधिकारिक क्लोन रिकार्ड बनाकर उसमें से मित्रा के सैंपल को निकालने में जुट गई है।
सैंपल छांटने के बाद आवाज मिलान के लिए इसे फोरेंसिक विभाग को भेजा जाएगा। विजिलेंस सूत्रों की मानें तो प्रमुख सचिव विजिलेंस संजय कुंडू ने मामले में जांच तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए थे।
इसके बाद मित्रा के वायस सैंपल जुटाने के लिए ब्यूरो ने भंडारी मामले के साक्ष्यों को इस मामले में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी। अब मित्रा के वायस सैंपल देने से इंकार करने के बाद लटकी जांच नए सिरे से तेजी पकड़ सकती है।
साल 2013 में विजिलेंस ने धारा 118 के तहत जमीन खरीद की मंजूरी देने के नाम पर कथित भ्रष्टाचार के मामले में जांच शुरू की थी। लंबे समय तक जांच ठंडे बस्ते में रही। ब्यूरो ने पिछले साल क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल की तो कोर्ट ने उसे खारिज कर दिया। इसके बाद नए सिरे से मामले की जांच शुरू हुई।
प्रदेश सरकार ने मित्रा को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ जांच के लिए विजिलेंस को मंजूरी दे दी। मामले में मित्रा व कई पूर्व अधिकारियों, कर्मचारियों व नामजद आरोपियों से पूछताछ की, लेकिन फोन रिकॉर्डिंग की आवाज को मित्रा की आवाज से मिलाने के मामले में मित्रा ने सैंपल देने से इंकार कर दिया।
इसके बाद विजिलेंस ने सीजेएम कोर्ट में आवेदन किया कि भंडारी मामले में केस प्रॉपर्टी रहे रिकॉर्डिंग को इस केस में स्थानांतरित कर दिया जाए। कोर्ट ने ब्यूरो के इस आवेदन को स्वीकार कर लिया, जिसके बाद अब ब्यूरो इन रिकार्डिंगों को बतौर साक्ष्य मित्रा मामले में इस्तेमाल कर रहा है।