छात्रवृत्ति घोटाले में सीआईडी की मदद लेगा शिक्षा महकमा
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केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं में घोटाला होने के मामले में शिक्षा विभाग सीआईडी की मदद लेगा। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले पोर्टल में कई खामियां सामने आने के बाद विभाग ने सीआईडी के साइबर सैल से मदद लेने का फैसला लिया है।
मामले की प्रारंभिक जांच में सूबे के 25 से अधिक निजी शिक्षण संस्थान शक के घेरे में हैं। छात्रवृत्ति पोर्टल बनवाने वाले अफसरों पर भी जांच की तलवार लटक गई है। सरकार की ओर से गठित जांच कमेटी के हाथ फर्जी एडमिशन करवाने के पुख्ता सबूत लगे हैं।
अब जल्द मामला हल होने की उम्मीद है। उच्च शिक्षा निदेशालय में गठित जांच कमेटी के सदस्यों ने बताया है कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपीई पास पोर्टल में कई खामियां मिली हैं। इनका लाभ उठाते हुए निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी एडमिशन दिखाकर विद्यार्थियों के नाम पर बैंक अकाउंट खोले और सरकारी धनराशि हड़पी है।
साइबर सैल करवाई जाएगी जांच
पोर्टल के माध्यम से की गड़बड़ियों को जांचने के लिए जांच कमेटी ने साइबर सैल से मदद लेने का फैसला लिया है। साइबर सैल से जांच करवाई जाएगी कि क्या गड़बड़ियां गलती से हुई हैं या इन्हें जानबूझ कर किया गया है। साइबर सैल की रिपोर्ट के आधार पर जांच कमेटी आगामी फैसला लेगी।
उधर, प्रारंभिक जांच के मुताबिक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों को मिलने वाली छात्रवृत्ति को खुद लेने के लिए कुछ निजी विश्वविद्यालयों ने शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ मिलकर धोखाधड़ी की है।
पोर्टल में भी जानबूझ कर खामियां रखी गई हैं। जांच कमेटी के पास कुछ अफसरों की संलिप्तता के सुबूत भी लगे हैं। ऐसे में अब शिक्षा विभाग के अफसरों पर शिकंजा कस सकता है।