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लाखों की गड़बड़ी में सेंट्रल यूनिवर्सिटी के अफसर को बचाने की तैयारी
सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला
Updated Wed, 13 Dec 2017 01:58 PM IST
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सेंट्रल यूनिवर्सिटी में कथित वित्तीय गड़बडिय़ां उजागर होने के बाद अब आरोपी अफसर और कर्मचारियों को बचाने की जुगत शुरू हो गई है। यह सवाल केंद्रीय विवि के वित्त अधिकारी की ओर से हाल ही में यूजीसी को लिखे पत्र के बाद उठ रहा है।
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सीयू के एक अफसर और कुछ कर्मचारियों की ओर से की गई कथित वित्तीय अनयिमितताओं की शिकायत के बाद यूजीसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में आरोपियों पर रिकवरी डालने और कार्रवाई के आदेश सीयू प्रशासन को दिए थे।
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लेकिन, अब सीयू प्रशासन ने केंद्रीय विवि के अफसर से रिकवरी करने के बजाय फिर से यूजीसी को ही अधिकारी की तनख्वाह तय करने के मानकों को फिर से तथ्यों सहित जांचने की सिफारिश कर दी है।
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रोचक यह है कि वित्त अधिकारी प्रो. हंसराज शर्मा ने यूजीसी को 23 नवंबर को लिखे पत्र में माना है कि वर्ष 2016 से 2017 तक आरोपी अधिकारी को रिकवरी के संबंध में 6 बार रिमाइंडर पत्र लिखने के बाद भी संतोषजनक जवाब नहीं आ रहा।
वर्ष 2015-16 की वार्षिक रिपोर्ट में कैग ने भी अधिकारी से 312394 लाख रुपये की ज्यादा ली तनख्वाह की रिकवरी करने के लिए कहा है। अधिकारी ने ज्यादा ले ली तनख्वाह सीयू प्रशासन को वापस नहीं की है।
वित्त अधिकारी ने पत्र में लिखा है कि इसके बाद उन्होंने मामला वीसी डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री के समक्ष लाया। वीसी ने इच्छा व्यक्त की है कि मामले को आगामी स्पष्टीकरण के लिए यूजीसी को भेजा जाए।
इसलिए, केंद्रीय विवि की ओर से अधिकारी की तय की गई तनख्वाह के मामले की अर्थशास्त्रीय सत्यता के लिए तर्कसंगत दस्तावेजों के साथ आगामी स्पष्टीकरण और आवश्यक आदेशों के लिए यूजीसी को भेजा जा रहा है।
उधर, केंद्रीय विवि के वीसी डॉ. कुलदीप अग्निहोत्री ने कहा कि मामला विचारधीन है। जबकि, वित्त अधिकारी प्रो. हंसराज शर्मा ने कहा कि वीसी के ध्यान में लाने के बाद मामला यूजीसी को भेजा है।
वित्त अधिकारी के पत्र के बाद उठ रहे ये सवाल
वर्ष 2016 में जांच करने के बाद यूजीसी जब अफसर को दोषी ठहरा कर दो साल तक ज्यादा ली गई 312394 लाख रुपये तनख्वाह की रिकवरी करने के लिए कह चुका है तो उस पर अमल करने के बजाय सीयू प्रशासन दोबारा मामले को यूजीसी को एक साल के बाद क्यों भेज रहा है।
आरोपी अधिकारी का कार्यकाल मार्च 2019 में खत्म हो रहा है। अगर वह इससे पहले ही नौकरी छोड़कर चले जाएं तो सीयू प्रशासन रिकवरी कैसे करेगा। क्योंकि, इससे पहले दूसरे विभाग से इंटरनल आडिट आफिसर के पद पर आए एक अधिकारी को जब पता चला कि उन पर यूजीसी ने 60 हजार रुपये की रिकवरी डाल दी तो वह सीयू छोड़कर वापस अपने पुराने महकमे में चले गए। अब तक उनसे सीयू प्रशासन रिकवरी नहीं कर पाया है।