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बहन को बचाने के लिए खड्ड में लगा दी छलांग, पिता ने खोईं प्यारी बेटियां
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स्वारघाट (बिलासपुर)। रोजी रोटी की तलाश में 40 साल पहले नेपाल से देवभूमि आए नेपाली मूल के किशन सिंह बहादुर को पता नहीं था कि भविष्य में उन्हें अपनी जान से प्यारी बेटियों को खोना पड़ेगा। अपने पिता का सहारा बनने वाली मासूम बच्चियां घर से लकड़ी की तलाश में तो निकलीं, लेकिन वापस जिंदा वापस नहीं लौटीं। मासूम बच्चियों के पिता गंभर पुल पर ढाबा चलाकर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार करीब 40 साल पहले नेपाल से किशन सिंह बहादुर हिमाचल आया और यहीं बस गया। यहीं शादी की और तीन बच्चे हुए। इनमें दो बेटियां और एक बेटा है। किशन सिंह की धर्मपत्नी मूक बधिर है। बच्चों को ज्यादातर वहीं संभालते हैं और उनकी पढ़ाई करवाते हैं। कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं। शनिवार को किशन सिंह ढाबे के लिए लकड़ी इकट्ठा करने गंभर खड्ड के समीप गया। दोनों बेटियां 12 वर्षीय दिव्या और 8 वर्षीय मनीषा भी अपने पिता के साथ गईं। लेकिन वे उनसे अलग हो गईं। किशन ने बताया कि छोटी बेटी मनीषा का पांव फिसल गया और वह खड्ड में गिर गई। उसे बचाने के लिए बड़ी बेटी दिव्या पानी में कूद गई। लेकिन दोनों ही मौत का ग्रास बन गईं। वहीं अब परिवार में किशन, पत्नी और छोटा बेटा बचा है।
नेपाल से अच्छी जिंदगी जीने के सपने लेकर हिमाचल आए इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने रामशहर थाना में केस दर्ज कर लिया है। शव पोस्टमार्टम के लिए बिलासपुर जिला अस्पताल भेजे गए हैं। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
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मिली जानकारी के अनुसार करीब 40 साल पहले नेपाल से किशन सिंह बहादुर हिमाचल आया और यहीं बस गया। यहीं शादी की और तीन बच्चे हुए। इनमें दो बेटियां और एक बेटा है। किशन सिंह की धर्मपत्नी मूक बधिर है। बच्चों को ज्यादातर वहीं संभालते हैं और उनकी पढ़ाई करवाते हैं। कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं। शनिवार को किशन सिंह ढाबे के लिए लकड़ी इकट्ठा करने गंभर खड्ड के समीप गया। दोनों बेटियां 12 वर्षीय दिव्या और 8 वर्षीय मनीषा भी अपने पिता के साथ गईं। लेकिन वे उनसे अलग हो गईं। किशन ने बताया कि छोटी बेटी मनीषा का पांव फिसल गया और वह खड्ड में गिर गई। उसे बचाने के लिए बड़ी बेटी दिव्या पानी में कूद गई। लेकिन दोनों ही मौत का ग्रास बन गईं। वहीं अब परिवार में किशन, पत्नी और छोटा बेटा बचा है।
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नेपाल से अच्छी जिंदगी जीने के सपने लेकर हिमाचल आए इस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने रामशहर थाना में केस दर्ज कर लिया है। शव पोस्टमार्टम के लिए बिलासपुर जिला अस्पताल भेजे गए हैं। रविवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिए जाएंगे।
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