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हिमाचल हाईकोर्ट: संसाधनों को बर्बाद करने के बजाय उनका सही उपयोग जरूरी, स्कूल का विलय सही

Wed, 09 Sep 2026 06:49 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Wed, 09 Sep 2026 06:49 PM IST
सार

हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के एक सरकारी मिडल स्कूल को नजदीकी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विलय करने के सरकार के फैसले को सही ठहराया।

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Himachal High Court: Proper utilization of resources is essential rather than wasting them; school merger is j
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिलासपुर जिले के एक सरकारी मिडल स्कूल को नजदीकी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में विलय करने के सरकार के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि कम छात्र संख्या वाले स्कूल में संसाधन बर्बाद करने के बजाय शिक्षा विभाग के शिक्षकों और कर्मचारियों का उपयोग ऐसे स्कूलों में करना अधिक तर्कसंगत है जहां छात्रों की संख्या पर्याप्त हो।न्यायाधीश अजय मोहन गोयल और न्यायाधीश योगेश जसवाल की खंडपीठ ने कहा कि यदि छात्रों को स्थानांतरित किए गए स्कूल की दूरी ऐसी होती कि उनके लिए वहां आसानी से पहुंचना संभव न होता तो अदालत इस आदेश में हस्तक्षेप कर सकती थी, लेकिन पैदल मात्र 500 मीटर और सड़क से 1.5 किमी की दूरी के कारण छात्रों को कोई असुविधा नहीं है।

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वर्तमान स्थिति और दूरी को देखते हुए सरकार का यह फैसला बिल्कुल भी मनमाना या तर्कहीन नहीं है। संसाधनों के उचित उपयोग और बच्चों को एक बेहतर पीयर-ग्रुप (सहपाठियों के बीच सीखने का माहौल) देने के लिए यह विलय न्यायसंगत है। अदालत ने स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया। याचिकाकर्ता स्कूल प्रबंधन समिति ने सरकार की 10 जून 2026 की उस अधिसूचना को चुनौती दी थी, इसमें राजकीय मिडल स्कूल संडयार (शिक्षा ब्लॉक घुमारवीं-एक, जिला बिलासपुर) को बंद करके उसका विलय नजदीकी राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छत में कर दिया गया था। सरकार की ओर से कोर्ट को सूचित किया गया कि जिस स्कूल में बच्चों को शिफ्ट किया गया है, उसकी दूरी सड़क मार्ग से महज 1.5 किलोमीटर और पैदल रास्ते से सिर्फ 500 मीटर है। पढ़ाई की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए 11 छात्रों को राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला छत और एक छात्र को राजकीय उच्च विद्यालय अंद्रोली में समायोजित कर दिया गया है।

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चंबा स्कूल तेलका में पारंपरिक छिंज, जातर मेले की अनुमति
 प्रदेश हाईकोर्ट ने चंबा की राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला तेलका के खेल मैदान में 12 और 13 सितंबर को दो दिवसीय पारंपरिक छिंज और जातर मेला करने की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कुछ अनिवार्य शर्तों के साथ आवेदन को मंजूरी दी है। खंडपीठ ने कहा है कि स्कूल की इमारत, संपत्ति और खेल मैदान को किसी भी प्रकार का नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा। आयोजन समाप्त होने के तुरंत बाद खेल मैदान को एकदम साफ-सुथरी स्थिति में स्कूल के प्रधानाचार्य को सौंपना होगा। मैदान में कानून के तहत अनुमत प्लास्टिक के अलावा किसी अन्य प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। सफाई व्यवस्था प्रशासन सुनिश्चित करेगा। प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखेगा। आयोजकों को संबंधित स्कूल के छात्र कल्याण कोष में 20,000 की राशि जमा करानी होगी। सुनवाई के दौरान अदालत को अवगत कराया गया कि तेलका स्कूल से सटे मैदान में यह मेला पिछले 40 से 50 वर्षों से करवाया जा रहा है।

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