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'टॉयलेट नहीं बना तो बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे'

Sun, 19 Oct 2014 12:51 PM IST
Updated Sun, 19 Oct 2014 12:51 PM IST
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sanjouli school have not the facility of toilet for students.

उपनगर संजौली के लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में बने प्राइमरी स्कूल में बच्चों को भेजना अभिभावकों को सुरक्षित नहीं लग रहा। स्कूल में वर्षों से शौचालय की सुविधा नहीं होने के कारण शौच और लघुशंका के लिए जंगल में जाना पड़ता है। आबादी बढ़ने और लोगों की लगातार आवाजाही के कारण अब इन बच्चों को जंगलों में जाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

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दिन भर 6 से 12 साल से बच्चे झाड़ियों की ओट तलाशते नजर आते हैं। अमर उजाला ने कुछ अभिभावकों से बात की और उन्हें पेश आ रही समस्याओं के बारे में जानने की कोशिश की। अभिभावकों ने कहा कि शौचालय रहित इस स्कूल में बच्चों को भेजने के बाद वे सुरक्षित नहीं समझते हैं, लेकिन कई पारिवारिक और आर्थिक मजबूरियों के कारण उन्हें बच्चों को इसी स्कूल में भेजना पड़ रहा है।
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संजौली में रह रहे लायक राम के दो बच्चे बेटा और बेटी इस स्कूल में पढ़ते हैं। वे कहते हैं कि आर्थिक स्थिति की वजह से चाह कर भी वे स्कूल नहीं बदल पा रहे हैं। लेकिन अब हद पार हो गई है। स्कूल भेजने के बाद उनकी सुरक्षा को लेकर र्कई सवाल उठते हैं। ओम प्रकाश और ललिता देवी का संजौली में अपना व्यवसाय है। इनकी बेटी और बेटे ने प्राइमरी स्कूल में दाखिला लिया है।
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15 दिन का दिया अल्टीमेटम

sanjouli school have not the facility of toilet for students.

ललिता देवी ने कहा कि उनके बच्चों को स्कूल में शौचालय नहीं होने कारण कई दिक्कतें आती हैं। सरकार को इस प्रकरण पर संवेदनशील होना चाहिए। स्कूल में टायलेट होना एक अनिवार्य चीज है। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी की अध्यक्ष बिन्ता देवी ने कहा कि यदि शौचालय की सुविधा नहीं मिली तो वह अगले सत्र से इस स्कूल से अपने दोनों बच्चों को हटा लेंगी। प्रकाश चंद की बेटी इस स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ती है। वे कहते हैं कि जैसे ही वह बच्ची को स्कूल छोड़ते हैं तो उन्हें वैसे ही उसकी सुरक्षा को लेकर चिंता सताने लगती है।

भीखू राम धीमान, मो. याकूब, संतोष, अमर चंद, भगत राम सहित अन्य कई अभिभावकों ने सरकार और विभाग से कहा कि वे शीघ्र से शीघ्र बच्चों के लिए स्कूल में शौचालय की सुविधा दिलाएं ताकि वे चिंता मुक्त होकर बच्चों को स्कूल भेज सकें। अभिभावकों ने कहा कि विभिन्न मजबूरियों के चलते अभिभावक अपने बच्चों का स्कूल नहीं बदल सकते, लेकिन सरकार और विभाग के तो इसके निर्माण के लिए गंभीरता दिखानी चाहिए।

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