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बड़े अधिकारियों से छिपाकर अपने स्तर पर कर ली सैनिटाइजर खरीद, विजिलेंस जांच में खुलासा

Mon, 22 Jun 2020 03:34 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Mon, 22 Jun 2020 03:34 AM IST
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sanitizer Purchage scam update of himachal pradesh, vigilance investigation reveal
सांकेतिक तस्वीर

सचिवालय में हुए सैनिटाइजर घोटाले में अब तक की विजिलेंस जांच में यह साफ हो गया है कि सचिवालय प्रशासन विभाग के आला अधिकारियों की जानकारी के बिना ही पूरी खरीद की प्रक्रिया को अपने हिसाब से अपना लिया गया। कोविड के दौरान ज्यादातर अधिकारी घर से या फोन पर ही काम कर रहे थे। ऐसे में कोविड जैसी महामारी के दौरान भी भ्रष्टाचार का खेल करने वालों ने उनकी गैर मौजूदगी का पूरा फायदा उठाया। जांच के अनुसार 18 मार्च को जारी सप्लाई आर्डर में तीन हजार सैनिटाइजर खरीदने का निर्णय बिना अधिकारियों की जानकारी के ही कर लिया गया। अधिकारियों को सिर्फ यह पता था कि सैनिटाइजर खरीदे जा रहे हैं लेकिन वह तीन हजार खरीदे जा रहे हैं या सौ-पांच सौ मिली लीटर की शीशी में, इसकी किसी आला अधिकारी को न तो जानकारी थी और न ही नोटिंग शीट में कहीं भी इसे दर्ज किया गया।

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वहीं सचिव सचिवालय प्रशासन के सामने पेश करते समय भी सैनिटाइजर की संख्या और अनुमानित खर्च का कोई विवरण नहीं दिया गया था। इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि भ्रष्टाचार करने वालों ने सप्लाई करने वाली फर्म को फायदा पहुंचाने के लिए सैनिटाइजर का रेट एक साल के लिए अप्रूव कर दिया जबकि किस प्रावधान के तहत ऐसा किया गया, यह किसी भी सरकारी दस्तावेज में दर्ज नहीं है। वहीं, कोटेशन की तुलनात्मक स्टेटमेंट में सेक्शन अफसर के हस्ताक्षर भी नहीं थे लेकिन तब भी फर्म को सप्लाई आर्डर दे दिया गया। जाहिर है, विजिलेंस जांच में ऐसे तथ्य सामने आने के बाद सचिवालय के उन कर्मचारियों की गर्दन मुश्किल में फंस गई है जिन्होंने फर्म के साथ मिलकर कोविड फंड का दुरुपयोग कर पैसा हड़पने की कोशिश की है। सूत्रों के अनुसार फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट आने के बाद ब्यूरो मामले में चार्जशीट दाखिल कर सकता है। 

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सस्पेंड अधीक्षक ने जवाब में लिखा, सारे आरोप निराधार

 सैनिटाइजर घोटाले में सस्पेंड अधीक्षक सहित दो लिपिक और एक जूनियर असिस्टेंट ने सरकार को जवाब भेज दिया है। अधीक्षक ने अपने जवाब में कहा है कि जिस समय सैनिटाइजर टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई उस समय उनके पास दो विभागों का चार्ज था। उन्होंने चार्जशीट मामले में अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है।

अब सरकार की ओर से आरोपों की सही जांच पड़ताल करने के लिए इंक्वायरी ऑफिसर की तैनाती होनी है। प्रदेश सरकार की ओर विजिलेंस को सौंपा है। विजिलेंस भी अपने स्तर पर मामले की जांच कर रही है। महिला अधिकारी को मामले में क्लीन चिट दे दी है। यह इसलिए कि जब यह घोटाला हुआ वह कोरोना के चलते कार्यालय में नहीं आई हैं। 

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