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Shimla News: तीन एसटीपी के सैंपल फेल पेयजल दूषित होने का अंदेशा
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तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों के सैंपल फेल जलस्रोत के दूषित होने का खतरा
अमर उजाला एक्सक्लूसिव
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को भेजा नोटिस, ढली, लालपानी और स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में दिक्कत
प्लांट से अश्वनी खड्ड तक पहुंच रहा है दूषित पानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के तीन बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। शहर के ढली, लालपानी और स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़ा जा रहा पानी दूषित पाया गया है।
इससे अब निचले इलाकों के पेयजल स्रोतों के दूषित होने का अंदेशा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में सैंपल फेल होने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार लालपानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल लगभग लगातार फेल आ रहे हैं। इस प्लांट पर क्षमता से ज्यादा सीवरेज पहुंच रहा है। वहीं इस एसटीपी से जो पानी छोड़ा जाता है वह निचले इलाके से गुजर रही अश्वनी खड्ड में जा रहा है। हालांकि, इस खड्ड से शिमला शहर को तो अब पानी की आपूर्ति नहीं होती लेकिन सोलन शहर के लिए इसी खड्ड से पानी की आपूर्ति की जा रही है। यही नहीं, शिमला और सोलन के निचले ग्रामीण इलाकों में सिंचाई समेत कई कामों में इसका पानी इस्तेमाल हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि एसटीपी से छोड़े जा रहे दूषित पानी को लेकर कंपनी को भी नोटिस भेज दिया गया है।
स्नोडन और ढली में भी सैंपल फेल
स्नोडन और ढली में बने एसटीपी से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल भी फेल हुए हैं। इन प्लांट के निचले इलाकों में कई नाले हैं जिनका पानी दूषित होने का अंदेशा है। शिमला शहर में दस साल पहले भी दूषित पानी से पीलिया फैल चुका है जिसमें 30 से ज्यादा लोगों की जानें चली गई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर 15 दिन बाद एसटीपी से सैंपल लेता है। कंपनी का दावा है कि पिछली रिपोर्ट में सभी प्लांट के सैंपल सही आए थे। कई बार सैंपल सही नहीं रहते। इस बार सैंपल फेल हुए हैं जिसके बाद फिर से सैंपल भरे गए हैं। कंपनी के अनुसार प्लांट से ट्रीटमेंट के बाद ही पानी आगे छोड़ा जा रहा है।
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रोज रख रहे हैं निगरानी : एजीएम
सभी प्लांट की रोज मॉनीटरिंग हो रही है। ट्रीटमेंट के बाद ही प्लांट से पानी छोड़ते हैं। लालपानी प्लांट से भी ट्रीटमेंट के बाद ही पानी छोड़ा जा रहा है, इसे अपग्रेड भी किया जा रहा है। दिसंबर तक इसका काम पूरा होगा। नई तकनीक से यहां अब सीवरेज ट्रीट होगा। मल्याणा में काम पूरा हो चुका है।
-संजय कौशल, एजीएम पेयजल कंपनी
कोट
शहर में लालपानी समेत तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। इस बारे में पेयजल कंपनी को भी नोटिस दिया गया है।
-ललित ठाकुर, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी
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अमर उजाला एक्सक्लूसिव
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी को भेजा नोटिस, ढली, लालपानी और स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में दिक्कत
प्लांट से अश्वनी खड्ड तक पहुंच रहा है दूषित पानी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी के तीन बड़े सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल जांच में फेल हो गए हैं। शहर के ढली, लालपानी और स्नोडन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़ा जा रहा पानी दूषित पाया गया है।
इससे अब निचले इलाकों के पेयजल स्रोतों के दूषित होने का अंदेशा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट में सैंपल फेल होने का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार लालपानी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल लगभग लगातार फेल आ रहे हैं। इस प्लांट पर क्षमता से ज्यादा सीवरेज पहुंच रहा है। वहीं इस एसटीपी से जो पानी छोड़ा जाता है वह निचले इलाके से गुजर रही अश्वनी खड्ड में जा रहा है। हालांकि, इस खड्ड से शिमला शहर को तो अब पानी की आपूर्ति नहीं होती लेकिन सोलन शहर के लिए इसी खड्ड से पानी की आपूर्ति की जा रही है। यही नहीं, शिमला और सोलन के निचले ग्रामीण इलाकों में सिंचाई समेत कई कामों में इसका पानी इस्तेमाल हो रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि एसटीपी से छोड़े जा रहे दूषित पानी को लेकर कंपनी को भी नोटिस भेज दिया गया है।
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स्नोडन और ढली में भी सैंपल फेल
स्नोडन और ढली में बने एसटीपी से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल भी फेल हुए हैं। इन प्लांट के निचले इलाकों में कई नाले हैं जिनका पानी दूषित होने का अंदेशा है। शिमला शहर में दस साल पहले भी दूषित पानी से पीलिया फैल चुका है जिसमें 30 से ज्यादा लोगों की जानें चली गई थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हर 15 दिन बाद एसटीपी से सैंपल लेता है। कंपनी का दावा है कि पिछली रिपोर्ट में सभी प्लांट के सैंपल सही आए थे। कई बार सैंपल सही नहीं रहते। इस बार सैंपल फेल हुए हैं जिसके बाद फिर से सैंपल भरे गए हैं। कंपनी के अनुसार प्लांट से ट्रीटमेंट के बाद ही पानी आगे छोड़ा जा रहा है।
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रोज रख रहे हैं निगरानी : एजीएम
सभी प्लांट की रोज मॉनीटरिंग हो रही है। ट्रीटमेंट के बाद ही प्लांट से पानी छोड़ते हैं। लालपानी प्लांट से भी ट्रीटमेंट के बाद ही पानी छोड़ा जा रहा है, इसे अपग्रेड भी किया जा रहा है। दिसंबर तक इसका काम पूरा होगा। नई तकनीक से यहां अब सीवरेज ट्रीट होगा। मल्याणा में काम पूरा हो चुका है।
-संजय कौशल, एजीएम पेयजल कंपनी
कोट
शहर में लालपानी समेत तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़े जा रहे पानी के सैंपल फेल पाए गए हैं। इस बारे में पेयजल कंपनी को भी नोटिस दिया गया है।
-ललित ठाकुर, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी