चंबा: यूक्रेन से घर लौटीं दो छात्राएं, भावुक होकर मां से लिपटीं इफशिता
यूक्रेन से हिमाचल प्रदेश के चंबा की इफशिता और अरुंधति मंगलवार शाम साढ़े सात बजे घर पहुंचीं। माता-पिता अपनी बेटियों के घर पहुंचते ही भावुक हो गए।
विस्तार
यूक्रेन के उजहोरोड शहर से हिमाचल प्रदेश के चंबा की इफशिता और अरुंधति मंगलवार शाम साढ़े सात बजे घर पहुंचीं। माता-पिता अपनी बेटियों के घर पहुंचते ही भावुक हो गए। वहीं, परिजनों के चेहरों पर बेटियों के लौटने की खुशी भी साफ झलक रही थी। इफशिता ने घर पहुंचते ही अपने माता-पिता के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया। अरुंधति के घर पहुंचने के कुछ ही देर में परिजन उसे अपने साथ ऐतिहासिक लक्ष्मीनारायण मंदिर ले गए। अमर उजाला से बातचीत में इफशिता ने बताया कि यूक्रेन के उजहोरोड नेशनल यूनिवर्सिटी में वह एमबीबीएस की प्रशिक्षु हैं। वह अपने सहपाठियों संग शहर में स्थित हॉस्टल में रह रही थीं। बदले हालात के बीच भारत सरकार और परिजनों से मिलने की उम्मीद से ही वे आगे बढ़े। कहा कि उनके हॉस्टल से हंगरी बोर्डर तक 120 किमी का सफर रहा। जिसे बसों के जरिये पूरा किया। भारतीय दूतावास के आदेशानुसार बसों के आगे भारतीय झंडे और एक लेटर के जरिये उन्हें कहीं पर भी नहीं रोका गया। महज एयरपोर्ट पर उन्हें पासपोर्ट चैकिंग के लिए कुछ देर के लिए इंतजार करना पड़ा। वहां से वह विशेष विमान में दिल्ली पहुंचे।
दिल्ली से आगे सुबह 9:40 मिनट पर दिल्ली से गगल एयरपोर्ट के लिए विमान में रवाना हुए। लेकिन, बीच में खराब मौसम और तकनीकी कारण बीच में ही उनका विमान वापस दिल्ली लौटा। इसके बाद पौने एक बजे फिर से उनका विमान दिल्ली से गगल एयरपोर्ट के लिए रवाना हुआ। दो बजकर 35 मिनट पर उनका विमान गगल एयरपोर्ट पर उतरा जहां से आगे वे अपनी निजी गाड़ी में चंबा के लिए रवाना हुए और देरशाम अपने परिवार से मिले। इफशिता ने बताया कि उजहोरोड में हालात काफी खार्किव की अपेक्षा कुछ ठीक रहे। लेकिन, खार्किव में उनके दोस्त रहते हैं। उनसे बात करने पर पता चला कि वे बंकरों में रहने को मजबूर हैं। धीरे-धीरे खाने-पीने का सामान भी खत्म होता गया है। अब खाने की भी समस्या से जूझ रहे हैं। कहा कि बदलते हालात सामान्य होने पर भी वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी। उन्होंने भारत सरकार, भारतीय दूतावास और प्रदेश सरकार का आभार जताया है।
खार्किव में फंसे चंबा के दो एमबीबीएस प्रशिक्षु
वहीं, यूक्रेन के खार्किव में जिले के दो एमबीबीएस प्रशिक्षु फंसे हुए हैं। हॉस्टलों, मेट्रो स्टेशन और बंकरों में चंबा के दो बच्चों समेत ढाई सौ लोग फंसे हैं। रूस के हमले के बाद हो रही गोलीबारी के कारण ये लोग बाहर तक नहीं निकल पा रहे हैं। इन लोगों को अब भूखे-प्यासे समय काटना पड़ रहा है। हालात बिगड़ने पर बच्चों की चिंता में परिजन व्याकुल हो उठे हैं। परिवार के सदस्यों की अब भारतीय एंबेसी और भारत सरकार के निर्णय पर ही निगाहें टिकी हैं। अब परिवार के लोग टीवी से पल भर अपनी निगाहें नहीं हटा रहे हैं।
यूक्रेन के शहर खार्किव में उजगोद स्थित नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए सात बच्चों में से चार प्रशिक्षु सरकार के हस्तक्षेप से अपने घर लौट आए हैं। रूस की खार्किव की ओर से बढ़ती सेना से बच्चों के परिवार चिंतित हो गए हैं। अपराजिता शर्मा, यमन चारक और संकल्प अभी घर नहीं लौटे हैं। हालांकि, संकल्प रोमानिया बार्डर पर पहुंच चुका है, जहां से एयरपोर्ट से विशेष विमान के जरिये वह दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचेगा।