टनल बनने पर भी सेना के लिए खुला रहेगा रोहतांग दर्रा
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रोहतांग टनल बनने पर भी सेना के लिए रोहतांग दर्रे से होकर गुजरने वाली सड़क खुली रहेगी। सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मनाली-लेह मार्ग पर आगामी वर्ष रोहतांग टनल बनकर तैयार हो जाएगी।
ऐसे में मनाली-रोहतांग दर्रे के बजाए सेना का काफिला मनाली-धुंधी रोहतांग टनल होकर सिस्सू पहुंचेगा। लेकिन सामरिक दृष्टि से अहम मनाली-लेह मार्ग में सेना के लिए रोहतांग दर्रा भी खुला रखा जाएगा। इसके लिए मनाली से रोहतांग दर्रा सड़क बीआरओ के अधीन ही रहेगी।
टनल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी होने पर रोहतांग टनल के बजाए सैन्य काफिला रोहतांग दर्रे से होकर कारगिल तक पहुंचेगा। जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों को देखते हुए सेना की मूवमेंट को मनाली-लेह मार्ग से महफूज बनाए रखने को लेकर बीआरओ पूरी तरह से मुस्तैद है।
कारगिल युद्ध में मनाली-लेह सड़क अपनी सामरिक महत्ता दर्ज करवा चुकी है। यह सड़क कारगिल युद्ध में सेना के लिए बेहद काम आया है। ऐसे में भविष्य में इस सड़क को उपयोगी मानते हुए सेना की कानवाई को सही समय पर पहुंचाने को लेकर इस सड़क को वैकल्पिक तौर पर खुला रखेगा।
एमओडी की प्राथमिकता एक टनल में है शिंकुला टनल
483 किलोमीटर लंबे मनाली-लेह मार्ग में रोहतांग टनल बनने से 50 किलोमीटर की दूरी कम हो जाएगी। इधर, सीमा सड़क संगठन के अतिरिक्त महानिदेशक मोहन लाल ने बताया कि मनाली-रोहतांग मार्ग को बीआरओ रोहतांग टनल बनने के पांच सालों तक अपने अधीन ही रखेगा।
टनल में किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर रोहतांग दर्रा होकर ही आवाजाही होगी। मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस (एमओडी) की प्राथमिकता एक टनल में शिंकुला टनल भी शामिल है। एमओडी में शिंकुला टनल का प्रस्ताव भेजा गया है।
यहां से जल्द स्वीकृति मिलने की संभावना है। स्वीकृति मिलने पर कंसलटेंसी कांट्रेक्ट के लिए टेंडर किए जाएंगे। कंसलटेंसी रिपोर्ट मिलने के बाद डीपीआर बनाई जाएगी। बीआरओ के अतिरिक्त महानिदेशक मोहन लाल ने बताया कि शिंकुला टनल का निर्माण दो वर्ष तक शुरू होने की उम्मीद है। जल्द शिंकुला सड़क भी बनकर तैयार होगी।