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अनुसूचित जाति के बेसहारा बुजुर्ग का सवर्णों ने किया अंतिम संस्कार, पेश की सामाजिक समरसता की मिसाल
Thu, 29 Oct 2020 05:00 AM IST
Krishan Singh
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, सोलन
शशिभूषण पुरोहित, अमर उजाला, सोलन
Published by: Krishan Singh
Updated Thu, 29 Oct 2020 05:00 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल के सोलन जिले के अर्की उपमंडल की पलोग पंचायत के गांव रोड़ी में सवर्ण जाति के लोगों ने सामाजिक समरसता और समानता की मिसाल पेश की है। रोड़ी गांव में बेसहारा एक अनुसूचित जाति से संबंधित बुजुर्ग सेवादार कपूरू राम (87) का देहांत हो गया तो गांव के सवर्ण वर्ग के लोगों ने उसका सवर्णों के लिए बने श्मशानघाट पर अंतिम संस्कार कर सदियों से चली आ रही जातिवाद की दीवार को तोड़ दिया।
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गौर हो कि हिमाचल के कई ग्रामीण इलाकों में जातिवाद आज भी इतना हावी है कि प्रत्येक गांव में सवर्ण और अनुसूचित जाति के लोगों के अलग-अलग श्मशानघाट हैं। परंपरानुसार अनुसूचित जाति के लोग सवर्णों के श्मशानघाट में शवदाह नहीं करते। सेवादार कपूरू राम के संरक्षक मदन चौहान ने बताया कि कपूरू राम अनुसूचित जाति से संबंधित थे। उनका कोई भी परिजन गांव में नहीं था, लेकिन मिलनसार स्वभाव के मालिक कपूरू राम का सेवा भाव ऐसा था कि वह किसी को काम के लिए मना नहीं करते थे और तकनीकी तौर पर भी कई कार्यों में दक्ष थे।
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स्थानीय निवासी मदन चौहान, मेहर चंद चौहान, भगत राम, पंकज चौहान, अजय चौहान, विजय चौहान, प्रेम चंद चौहान तथा राजेंद्र चौहान ने बताया कि कपूरू राम के स्वभाव को देखते हुए ग्रामीणों ने उनका अंतिम संस्कार सवर्णों के लिए बनाए श्मशानघाट में करने का निर्णय लिया। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों की कोशिश है कि आगे भी इस परंपरा का निर्वहन किया जाएगा, ताकि समाज के सभी वर्गों में समरसता बनी रहे।
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