...तो अब ये होगा प्राइमरी का सिलेबस
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हिमाचल प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता लाने के लिए सरकार गंभीर हो गई है। राज्य सरकार ने पहली से पांचवीं तक की शिक्षा के स्तर में सुधार को लेकर विभाग से तीन महीने में रिपोर्ट तलब की है। इसके लिए विभाग को अंग्रेजी के अलावा हिंदी और गणित विषयों के सिलेबस का पुनरीक्षण और अन्य बोर्ड के सिलेबल से भी तुलनात्मक अध्ययन करने के निर्देश जारी किए है।
अभी प्राइमरी स्कूलों में हिमाचल बोर्ड का सिलेबस पढ़ाया जा रहा है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि पुनरीक्षण और तुलनात्मक अध्ययन के बाद अन्य बोर्ड का सिलेबस पढ़ाने की सिफारिश होती है तो अगले शैक्षणिक सत्र से स्कूलों में बच्चों को नया पाठ्यक्रम पढ़ने को मिलेगा।
इन स्कूलों में भी शुरू होगी पंजाबी उर्दू
जिन स्कूलों में 30 से 40 विद्यार्थी पंजाबी और उर्दू पढ़ने के इच्छुक हैं अब उन स्कूलों में भी दोनों विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। अभी यह संख्या 50 और इससे अधिक हैं। ऐसेे में स्कूलों की संख्या बढ़ने के साथ साथ इन विषयों को शिक्षकों को भी रोजगार के अवसर मिलेंगे।
प्रदेश में गिरते शिक्षा के स्तर के मद्देनजर सरकार ने पांचवीं और आठवीं की परीक्षा फिर से शिक्षा बोर्ड से करवाने के निर्देश जारी किए हैं। हालांकि बोर्ड भी विद्यार्थियों को फेल नहीं कर पाएगा और ई और ई प्लस ग्रेड हासिल करने वाले छात्र और छात्राएं अगली कक्षा में बैठ जाएंगे। बोर्ड से परीक्षाएं करवाने के पीछे सरकार का मानना है कि इससे बच्चों और शिक्षकों पर एक दबाव बना रहेगा जो पढ़ने और पढ़ाने में गंभीरता दिखाएगा।
फेल होने का डर नहीं होगा तो पढ़ाई में गंभीरता नहीं
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह कई मंचों से यह कह चुके हैं कि बोर्ड के माध्यम से परीक्षा न होने और फेल नहीं होने कारण परीक्षा के स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने कहा था कि जब बच्चों को फेल होने का डर ही नहीं रहेगा तो पढ़ाई में भी गंभीरता नहीं दिखाएंगे।
हाल ही में सर्व शिक्षा अभियान के सर्वे में पहली से आठवीं तक के 80 फीसदी बच्चों के ई और ई प्लस ग्रेड (फेल) आए थे। जिसके बाद सरकार भी शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के प्रयासों के मद्देनजर कई फैसले कर चुकी है।
तीन महीने में मांगी है रिपोर्ट
पहली से पांचवीं तक के सिलेबस में स्टेंडर्ड के इंप्रूवमेंट को लेकर विभाग से तीन महीने में रिपोर्ट मांगी गई है। सरकार प्रारंभिक शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए गंभीर है। रिपोर्ट आने बाद ही सिलेबस बदलाव में फैसला लिया जाएगा।
- पीसी धीमान, प्रधान सचिव शिक्षा