118 की अनुमति के 20 लाख तक वसूलते थे राजस्व अधिकारी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रदेश के चर्चित घोटालों में शुमार 118 के तहत जमीन खरीदने की अनुमति देने के मामले की जांच में हैरान करने वाले तथ्य सामने आए हैं। विजिलेंस की अब तक की जांच में यह बात सामने आई है कि जमीन खरीदने में 118 की मंजूरी देने के लिए बीस लाख रुपये तक घूस ली जाती थी।
यह रकम चंडीगढ़ में एक मध्यस्थ के जरिये आवेदन करने वाली पार्टियों से मिलती थी। इसके अलावा उन्हें मंजूरी का आश्वासन भी किसी ओर के माध्यम से ही दिलाया जाता था। अब तक की विजिलेंस जांच में खुलासा हुआ है कि अकेले 2010 में ही राजस्व विभाग ने ढाई सौ से ज्यादा मामलों में 118 के तहत अनुमति दे दी।
विभागीय सूत्रों की मानें तो अब विभाग छोटे अधिकारियों और कर्मचारियों के बाद बड़े स्तर के अफसरों से पूछताछ करने की तैयारी में है। सूत्रों का कहना है कि अगर अफसरों ने पूछताछ में शामिल होने से इंकार किया तो उन्हें गिरफ्तार भी किया जा सकता है।
सरकारी गवाह बढ़ाएंगे मुश्किलें
सूत्रों की मानें तो मामले की जांच के दौरान अब तक आधा दर्जन लोगों ने बतौर सरकारी गवाह अपने बयान दर्ज कराने की रजामंदी दे दी है। उनकी रजामंदी के बाद विजिलेंस ब्यूरो ने मामले में 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
नाम न लिखने की शर्त पर एक जांच अधिकारी ने बताया कि अगर इन गवाहों ने ब्यूरो को दिए बयानों को मजिस्ट्रेट के सामने दोहरा दिया तो उच्चपदस्थ अधिकारियों और पूर्व अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ना तय हैं।