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ताजा रिपोर्टः हिमाचल में हो सकती है बड़ी तबाही

Fri, 31 Oct 2014 09:43 AM IST
Updated Fri, 31 Oct 2014 09:43 AM IST
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research reveals big threat to himachal.

ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झीलें टूटने से हिमाचल में बड़ी तबाही हो सकती है। ग्लोबल वार्मिंग से हिमालय के ग्लेशियर लगातार टूटकर झीलों का रूप ले रहे हैं। ये झीलें कभी भी टूट सकती है। ये खुलासा वैज्ञानिकों के ताजा शोध में हुआ है।

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यह चेतावनी वीरवार को हिमालयन ग्लेशियोलॉजी पर शिमला के पीटरहॉफ में हुए राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन वैज्ञानिकों ने दी। उन्होंने ऐसे ग्लेशियरों और झीलों की लगातार मानिटरिंग की जरूरत जताई। उन्होंने यह तथ्य भी रखा कि उत्तराखंड में भी ग्लेशियरों के पिघलने से बनी झील टूटने के बाद तबाही हुई थी।
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भारत सरकार के विज्ञान एवं इंजीनियरिंग अनुसंधान बोर्ड और हिमाचल प्रदेश जलवायु परिवर्तन केंद्र के दो दिवसीय संयुक्त सम्मेलन में देश भर के वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं।

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कई वैज्ञानिकों ने पूरा किया शोध

research reveals big threat to himachal.

वीरवार को ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक राजेश कुमार, इसरो के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के वैज्ञानिक बीपी राठौर, राज्य जलवायु परिवर्तन कें द्र शिमला के विशेषज्ञ एसएस रंधावा, अंजना शर्मा और अरविंद भारद्वाज ने संयुक्त शोध पत्र में कहा कि सतलुज, रावी, चिनाब और ब्यास बेसिन में मल्टी स्पेक्ट्रल सेटेलाइट तस्वीरों की स्टडी से यह मालूम हुआ है कि अधिकतर ग्लेशियरों का आकार बिगड़ता जा रहा है।

इनसे झीलें बन रही हैं। इन झीलों से हिमाचल के निचले ड्रेनेज सिस्टम से सटे क्षेत्रों में मानवीय जीवन और आधारभूत ढांचे को खतरा है। वर्तमान अध्ययन 2013 में एलआईएसएस थ्री सेटेलाइट डाटा से किया है।

हिमालय के ग्लेशियरों से बनीं 596 झीलें

research reveals big threat to himachal.

स्टडी के मुताबिक सतलुज बेसिन पर 391 झीलें बन गई हैं। इनमें से 75 झीलें 5 से 10 हेक्टेयर क्षेत्र और 40 झीलें 10 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फेली हैं। चिनाब बेसिन पर 116 झीलें हैं।

एक दशक पहले ये 55 थीं। ब्यास बेसिन में कुल 67 झीलों में से दो झीलें 5 से 10 हेक्टेयर क्षेत्र में हैं। रावी बेसिन में 22 झीलों में से दो का क्षेत्र 10 हेक्टेयर से ज्यादा का है। इन सभी बेसिन में अन्य झीलें पांच हेक्टेयर से कम क्षेत्र में हैं।

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