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Shimla News: ई-वाहन, बैटरी तकनीक पर एचपीयू में रिसर्च मिशन शुरू
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विवि में आयोजित समीक्षा बैठक में योजना को गति देने पर की गई चर्चा, बाजार तक अनुसंधान की वकालत
आईआईटी रोपड़ के नेतृत्व में 8 विवि ने बनाई कार्य योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक और हरित ऊर्जा से जुड़े शोध को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर उद्योगों तथा बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से पहली बार बड़े स्तर पर साझा अनुसंधान मॉडल लागू किया है। इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी तकनीक पर एचपीयू में भी रिसर्च मिशन शुरू किया गया है।
राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की एएनआरएफ–पेयर योजना के तहत चल रहे इस प्रोजेक्ट की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में आईआईटी रोपड़ समेत आठ विश्वविद्यालयों ने कार्य योजना बनाई। योजना का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, मोटरों में इस्तेमाल होने वाली चुंबकीय सामग्री और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को सस्ता, टिकाऊ और अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार यही तकनीकें आने वाले दशक में परिवहन, ऊर्जा और रोजगार के स्वरूप को बदलेंगी जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी। बैठक में आईआईटी रोपड़ के निदेशक एवं परियोजना निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि भारत में तकनीकी शोध का बड़ा आधार विश्वविद्यालयों में मौजूद है। लेकिन संसाधनों और नेटवर्क की कमी के कारण उसका राष्ट्रीय लाभ नहीं मिल पाता। एएनआरएफ–पेयर मॉडल इसी खाई को पाटने के लिए तैयार किया है। इसमें बड़े संस्थान हब बनकर छोटे विश्वविद्यालयों को तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग देंगे। हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि बैटरी और ईवी तकनीक पर होने वाला यह शोध सीधे हरित ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और रोजगार सृजन से जुड़ा है। विश्वविद्यालय में ऊर्जा से जुड़े पांच शोध केंद्र स्थापित किए हैं, जहां स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकें राष्ट्रीय जरूरतों और औद्योगिक मांग से जोड़ी जाएंगी। उपकरण खरीद, प्रशासनिक देरी और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसी चुनौतियां शोध की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं। बैठक में मार्गदर्शक प्रो. नागेश ठाकुर और प्रो. एनएस नेगी, हिमाचल विश्वविद्यालय के सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. संदीप चौहान, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. रविकांत भाटिया, डॉ. रमेशचंद ठाकुर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रधान अन्वेषक, शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे।
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आईआईटी रोपड़ के नेतृत्व में 8 विवि ने बनाई कार्य योजना
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी तकनीक और हरित ऊर्जा से जुड़े शोध को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर उद्योगों तथा बाजार तक पहुंचाने के उद्देश्य से पहली बार बड़े स्तर पर साझा अनुसंधान मॉडल लागू किया है। इलेक्ट्रिक वाहन और बैटरी तकनीक पर एचपीयू में भी रिसर्च मिशन शुरू किया गया है।
राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन की एएनआरएफ–पेयर योजना के तहत चल रहे इस प्रोजेक्ट की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) शिमला में सोमवार को हुई समीक्षा बैठक में यह जानकारी दी गई। बैठक में आईआईटी रोपड़ समेत आठ विश्वविद्यालयों ने कार्य योजना बनाई। योजना का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरियों, मोटरों में इस्तेमाल होने वाली चुंबकीय सामग्री और ऊर्जा भंडारण प्रणालियों को सस्ता, टिकाऊ और अधिक प्रभावी बनाना है। विशेषज्ञों के अनुसार यही तकनीकें आने वाले दशक में परिवहन, ऊर्जा और रोजगार के स्वरूप को बदलेंगी जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी। बैठक में आईआईटी रोपड़ के निदेशक एवं परियोजना निदेशक प्रो. राजीव आहूजा ने कहा कि भारत में तकनीकी शोध का बड़ा आधार विश्वविद्यालयों में मौजूद है। लेकिन संसाधनों और नेटवर्क की कमी के कारण उसका राष्ट्रीय लाभ नहीं मिल पाता। एएनआरएफ–पेयर मॉडल इसी खाई को पाटने के लिए तैयार किया है। इसमें बड़े संस्थान हब बनकर छोटे विश्वविद्यालयों को तकनीकी और वैज्ञानिक सहयोग देंगे। हिमाचल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. महावीर सिंह ने कहा कि बैटरी और ईवी तकनीक पर होने वाला यह शोध सीधे हरित ऊर्जा, प्रदूषण नियंत्रण और रोजगार सृजन से जुड़ा है। विश्वविद्यालय में ऊर्जा से जुड़े पांच शोध केंद्र स्थापित किए हैं, जहां स्थानीय स्तर पर विकसित तकनीकें राष्ट्रीय जरूरतों और औद्योगिक मांग से जोड़ी जाएंगी। उपकरण खरीद, प्रशासनिक देरी और संसाधनों के बेहतर उपयोग जैसी चुनौतियां शोध की रफ्तार को प्रभावित कर रही हैं। बैठक में मार्गदर्शक प्रो. नागेश ठाकुर और प्रो. एनएस नेगी, हिमाचल विश्वविद्यालय के सह-प्रधान अन्वेषक डॉ. संदीप चौहान, डॉ. मनीष कुमार, डॉ. रविकांत भाटिया, डॉ. रमेशचंद ठाकुर सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्रधान अन्वेषक, शिक्षक और शोधार्थी उपस्थित रहे।
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