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RERA Himachal: समय पर फ्लैट का स्वामित्व न देने पर बिल्डर को 20 लाख रुपये जुर्माना
Tue, 13 Sep 2022 05:00 AM IST
Krishan Singh
पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला
पुष्पेन्द्र वर्मा, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Tue, 13 Sep 2022 05:00 AM IST
सार
प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण(रेरा) ने यूनीमैक्स बिल्डर्स को 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता को 1.30 करोड़ रुपये नौ फासदी ब्याज के साथ लौटाने के भी आदेश दिए हैं।
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अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण(रेरा)
- फोटो : www.hprera.in
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश अचल संपत्ति नियामक प्राधिकरण(रेरा) ने यूनीमैक्स बिल्डर्स को 20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। प्राधिकरण ने शिकायतकर्ता को 1.30 करोड़ रुपये नौ फासदी ब्याज के साथ लौटाने के भी आदेश दिए हैं। श्रीकांत बाल्दी की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि यदि दो महीने में आदेशों की अनुपालना नहीं की जाती है तो उस स्थिति में यूनीमैक्स बिल्डर्स को 5,000 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से जुर्माना देना होगा।
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अप्रैल 2018 में यूनीमैक्स बिल्डर के मालिक सुमित खन्ना ने शिकायतकर्ता को दो फ्लैट बेचने की पेशकश की थी। अपार्टमेंट देने के बदले शिकायतकर्ता का मुंबई स्थित रिहायशी मकान लेने के बारे करार किया था। यह फ्लैट कुल्लू जिले के बजौरा में हिमालयन हैबिटेंट के नाम से बनाए गए थे। रेरा से स्वीकृत एक फ्लैट की कीमत 65 लाख रखी गई थी। मुंबई निवासी कमल अर्जन मिरचंदानी और उसकी बेटी ने दो फ्लैट के लिए कुल 1.30 करोड़ की राशि यूनीमैक्स बिल्डर्स के पास जमा करवाई। 14 अप्रैल 2018 को बिल्डर्स ने शिकायतकर्ता को आवंटन पत्र जारी किया। इसमें अपार्टमेंट का स्वामित्व तीन वर्षों के भीतर दिया जाना था।
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शिकायतकर्ता ने जब इसका निरीक्षण किया तो यह प्रोजेक्ट निर्माणाधीन था। समय पर शिकायतकर्ता को इसका स्वामित्व नहीं दिया गया। शिकायतकर्ता ने तीन लाख रुपये पार्किंग फीस भी जमा करवाई थी। प्राधिकरण ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद पाया कि याचिकाकर्ता और यूनीमैक्स बिल्डर्स के बीच दो करारनामे पंजीकृत हुए थे। पहले के अनुसार बिल्डर्स ने दो अपार्टमेंट देने के बदले शिकायतकर्ता का मुंबई स्थित रिहायशी मकान लेने के बारे में करार किया था।
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दूसरे में शिकायतकर्ता को 1.30 करोड़ रुपये में दो अपार्टमेंट बेचने का करार किया गया था। पीठ ने पाया कि बिल्डर्स शिकायतकर्ता को गुमराह करने के लिए पहले करार का आधार बना रहा है। जबकि रिकॉर्ड के अनुसार यह स्पष्ट है कि बिल्डर्स ने शिकायतकर्ता से 1.30 करोड़ रुपये के बदले दो फ्लैट देने का करार किया था। पीठ ने पाया कि बजौरा का हिमालयन हैबिटेंट प्रोजेक्ट कानूनी पेच में फंसा है और उसका निर्माण होना मुश्किल है। इसके चलते पीठ ने याचिकाकर्ता के 1.30 करोड़ रुपये वापस करने के आदेश दिए हैं।