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Shimla News: अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में एनजीटी के समक्ष आज होगी रिपोर्ट
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अधूरे सीवरेज नेटवर्क पर सरकार, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड रखेंगे अपना पक्ष
जलस्रोतों और नदियों में गंदा पानी मिलने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में वीरवार को सुनवाई होगी। इसमें राज्य सरकार, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधूरे सीवरेज नेटवर्क तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
पिछली सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिए थे कि 96.41 किलोमीटर सीवरेज लाइन को एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जोड़ने की प्रगति और उसकी समय सीमा लिखित रिपोर्ट पेश करें। सामने आया था कि राज्य में चिह्नित 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 14 संचालित हैं जबकि पंडोह स्थित एक एसटीपी अब भी बंद है। स्वीकृत परियोजना रिपोर्टों के अनुसार 748.55 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क प्रस्तावित था जिसमें से 724.74 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन केवल 628.33 किलोमीटर नेटवर्क ही एसटीपी से जुड़ा है। शेष नेटवर्क के कारण गंदा पानी अब भी सीधे नालों और जल स्रोतों में पहुंच रहा है।
जल शक्ति विभाग ने पहले दावा किया था कि कनेक्टिविटी का 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष 12 प्रतिशत कार्य के लिए समय सीमा दी जाएगी। इस पर छह सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे जिनकी समीक्षा आज की सुनवाई में होनी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला, मंडी और सोलन जिलों में डिफाल्टर इकाइयों से पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी थी। इस वसूली प्रगति रिपोर्ट आज भी ट्रिब्यूनल के सामने रखी जानी है। ट्रिब्यूनल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कागजी दावे नहीं चाहिए बल्कि जमीन पर हुए काम के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करें।
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जलस्रोतों और नदियों में गंदा पानी मिलने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। अश्वनी खड्ड प्रदूषण मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में वीरवार को सुनवाई होगी। इसमें राज्य सरकार, जल शक्ति विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को अधूरे सीवरेज नेटवर्क तथा पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली पर स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
पिछली सुनवाई में ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिए थे कि 96.41 किलोमीटर सीवरेज लाइन को एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) से जोड़ने की प्रगति और उसकी समय सीमा लिखित रिपोर्ट पेश करें। सामने आया था कि राज्य में चिह्नित 15 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में से 14 संचालित हैं जबकि पंडोह स्थित एक एसटीपी अब भी बंद है। स्वीकृत परियोजना रिपोर्टों के अनुसार 748.55 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क प्रस्तावित था जिसमें से 724.74 किलोमीटर लाइन बिछाई जा चुकी है, लेकिन केवल 628.33 किलोमीटर नेटवर्क ही एसटीपी से जुड़ा है। शेष नेटवर्क के कारण गंदा पानी अब भी सीधे नालों और जल स्रोतों में पहुंच रहा है।
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जल शक्ति विभाग ने पहले दावा किया था कि कनेक्टिविटी का 88 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और शेष 12 प्रतिशत कार्य के लिए समय सीमा दी जाएगी। इस पर छह सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के निर्देश दिए थे जिनकी समीक्षा आज की सुनवाई में होनी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शिमला, मंडी और सोलन जिलों में डिफाल्टर इकाइयों से पर्यावरणीय मुआवजा वसूलने की प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी थी। इस वसूली प्रगति रिपोर्ट आज भी ट्रिब्यूनल के सामने रखी जानी है। ट्रिब्यूनल पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि कागजी दावे नहीं चाहिए बल्कि जमीन पर हुए काम के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करें।
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