फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   Report disclosed new facts in 150 crore rupee scholarship scam

50 फीसदी परिणाम नहीं होने के बावजूद जारी होती रही छात्रवृत्ति

Thu, 30 Aug 2018 01:21 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 30 Aug 2018 01:21 PM IST
विज्ञापन
Report disclosed new  facts in 150 crore rupee scholarship scam

शिक्षा विभाग में हुए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलने पर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अब बड़ा खुलासा हुआ है कि निजी संस्थानों में फर्स्ट ईयर का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत न होने के बावजूद सेकेंड ईयर में छात्रवृत्तियां जारी होती रही।

विज्ञापन


जबकि नियमानुसार किसी भी संस्थान को किसी पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में संबंधित प्रथम वर्ष की छात्रवृत्ति संख्या का 50 प्रतिशत नवीनीकरण अपरिहार्य है। यह किसी भी संस्थान के लिए नहीं किया गया।
विज्ञापन


संस्थानों से परीक्षा परिणाम की जानकारी जुटाए बिना ही छात्रवृत्तियां जारी होती रही। उच्च शिक्षा निदेशालय के अधिकारी नियमों का पालन करने की जगह इस मामले को लेकर आंखें मूंदे बैठे रहे।

विज्ञापन
विज्ञापन

सचिवालय स्तर पर हो रही मानीटरिंग

Report disclosed new  facts in 150 crore rupee scholarship scam

शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक कई संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में अधिकतम आवंटित छात्र संख्या से अधिक संख्या में छात्रवृत्ति दी गई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि संबंधित निजी संस्थान में संबंधित कोर्स की कितनी सीटें निर्धारित हैं और कितनों को छात्रवृत्ति जारी की गई।

रिपोर्ट के मुताबिक छात्रों को मेंटनेंस अलाउंस भी नहीं दिया गया। छात्रवृत्तियों का आवंटन गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों या गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को भी किया गया। शिक्षण संस्थानों के शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज कभी नहीं जांचे।

जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपी ई पास पोर्टल को निर्धारित अंतिम तिथि के बाद बिना सक्षम अधिकारी के भी खोला गया। पोर्टल को अंतिम तिथि के बाद किसे लाभ देने के लिए खोला गया। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।

विद्यार्थियों को दी जाने वाली सभी छात्रवृत्ति योजनाओं की मानीटरिंग अब सचिवालय स्तर पर हो रही है। बुधवार को माकपा विधायक राकेश सिंघा के सवाल पर लिखित जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच सीबीआई से करवाने का फैसला लिया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed