50 फीसदी परिणाम नहीं होने के बावजूद जारी होती रही छात्रवृत्ति
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शिक्षा विभाग में हुए 150 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले की परतें खुलने पर नए-नए खुलासे हो रहे हैं। अब बड़ा खुलासा हुआ है कि निजी संस्थानों में फर्स्ट ईयर का परीक्षा परिणाम 50 प्रतिशत न होने के बावजूद सेकेंड ईयर में छात्रवृत्तियां जारी होती रही।
जबकि नियमानुसार किसी भी संस्थान को किसी पाठ्यक्रम के द्वितीय वर्ष में संबंधित प्रथम वर्ष की छात्रवृत्ति संख्या का 50 प्रतिशत नवीनीकरण अपरिहार्य है। यह किसी भी संस्थान के लिए नहीं किया गया।
संस्थानों से परीक्षा परिणाम की जानकारी जुटाए बिना ही छात्रवृत्तियां जारी होती रही। उच्च शिक्षा निदेशालय के अधिकारी नियमों का पालन करने की जगह इस मामले को लेकर आंखें मूंदे बैठे रहे।
सचिवालय स्तर पर हो रही मानीटरिंग
शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट के मुताबिक कई संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में अधिकतम आवंटित छात्र संख्या से अधिक संख्या में छात्रवृत्ति दी गई। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने यह देखने की जहमत नहीं उठाई कि संबंधित निजी संस्थान में संबंधित कोर्स की कितनी सीटें निर्धारित हैं और कितनों को छात्रवृत्ति जारी की गई।
रिपोर्ट के मुताबिक छात्रों को मेंटनेंस अलाउंस भी नहीं दिया गया। छात्रवृत्तियों का आवंटन गैर मान्यता प्राप्त संस्थानों या गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रमों को भी किया गया। शिक्षण संस्थानों के शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मान्यता से संबंधित दस्तावेज कभी नहीं जांचे।
जांच में सामने आया है कि छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले एचपी ई पास पोर्टल को निर्धारित अंतिम तिथि के बाद बिना सक्षम अधिकारी के भी खोला गया। पोर्टल को अंतिम तिथि के बाद किसे लाभ देने के लिए खोला गया। इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को क्यों नहीं दी गई। इसको लेकर विभागीय अधिकारियों की कार्य प्रणाली संदेह के घेरे में आ गई है।
विद्यार्थियों को दी जाने वाली सभी छात्रवृत्ति योजनाओं की मानीटरिंग अब सचिवालय स्तर पर हो रही है। बुधवार को माकपा विधायक राकेश सिंघा के सवाल पर लिखित जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच सीबीआई से करवाने का फैसला लिया गया है।