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हिमाचल प्रदेश : आखिरी कश्मीर यात्रा, आखिरी बातचीत... अधूरा रह गया प्रारब्ध शुक्ला का जर्मनी जाने का सपना

Tue, 25 Aug 2026 12:06 PM IST
Ankesh Dogra धर्म सिंह तोमर, नाहन (सिरमौर)।
धर्म सिंह तोमर, नाहन (सिरमौर)। Published by: Ankesh Dogra Updated Tue, 25 Aug 2026 12:06 PM IST
सार

आईआईएम सिरमौर के बीएमएस तृतीय वर्ष के 19 वर्षीय छात्र प्रारब्ध शुक्ला की संदिग्ध मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। जून में कश्मीर यात्रा के दौरान परिवार के साथ बिताए उसके खुशनुमा पल अब आखिरी याद बन गए हैं। परिवार के अनुसार प्रारब्ध पढ़ाई में होनहार था और जर्मनी जाकर मास्टर्स करना चाहता था। परिजन मौत के कारणों की निष्पक्ष जांच और इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

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प्रारब्ध शुक्ला (फाइल फोटो)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

जून की छुट्टियों में परिवार के साथ कश्मीर की वादियों में बिताए गए खुशनुमा पल अब शुक्ला परिवार के लिए जिंदगी की सबसे पीड़ादायक याद बन गए हैं। कश्मीर यात्रा के दौरान परिवार के साथ हंसते-मुस्कुराते नजर आने वाले आईआईएम सिरमौर के बीएमएस तृतीय वर्ष के छात्र 19 वर्षीय प्रारब्ध शुक्ला की संदिग्ध मौत के बाद माता-पिता गहरे सदमे में हैं। मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी प्रोफेसर अनुपम शुक्ला और प्रीति शुक्ला अपने इकलौते बेटे की मौत की निष्पक्ष जांच और इंसाफ की मांग कर रहे हैं।

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परिवार के मुताबिक, कश्मीर यात्रा के दौरान प्रारब्ध ने पहलगाम समेत कई स्थानों पर परिवार के साथ समय बिताया था। यात्रा के दौरान उसके खुशमिजाज पलों को परिवार ने तस्वीरों और वीडियो में संजोया था। आईस स्केटिंग के दौरान बेटे की हंसी-ठिठोली ने माता-पिता को भी बेहद खुश किया था। उस वक्त परिवार ने कल्पना भी नहीं की थी कि साथ बिताए ये पल उनकी आखिरी पारिवारिक यादों में बदल जाएंगे।

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छुट्टियों के बाद खुद व्यवस्थित किया था बेटे का कमरा
परिवार के अनुसार छुट्टियों के बाद माता-पिता स्वयं सिरमौर आए थे। उन्होंने प्रारब्ध के हॉस्टल कमरे को अपने हाथों से व्यवस्थित किया था। परिजनों का कहना है कि कमरे की तलाशी के दौरान उन्हें कोई आपत्तिजनक वस्तु नहीं मिली।

परिवार ने बताया कि प्रारब्ध पिछले कुछ समय से मानसिक तनाव से गुजर रहा था और दिल्ली के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में उसका उपचार चल रहा था। वह दवाइयां ले रहा था और परिजनों के मुताबिक उसकी स्थिति में सुधार भी हो रहा था।
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15 अगस्त की बातचीत बनी आखिरी बातचीत
पिता अनुपम शुक्ला के अनुसार 15 अगस्त को उनकी प्रारब्ध से फोन पर बातचीत हुई थी। बातचीत सामान्य थी। प्रारब्ध ने सहज अंदाज में अपने पिता से कहा था कि उसके बालों में डैंड्रफ हो गई है। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यही पिता-पुत्र की आखिरी बातचीत बन जाएगी। इसके अगले दिन 16 अगस्त को प्रारब्ध ने अपनी मां से बात की। बातचीत में उसने आने वाली परीक्षाओं का जिक्र किया और मां से सुबह फोन करके जगाने के लिए कहा। 17 अगस्त की सुबह मां ने बेटे को फोन कर जगाया। परिवार के मुताबिक यही मां-बेटे की आखिरी बातचीत साबित हुई।

20 अगस्त को फोन किया, लेकिन नहीं मिला जवाब
परिवार के अनुसार 20 अगस्त को पिता ने प्रारब्ध को फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने व्हाट्सऐप पर संदेश भेजकर वापस फोन करने को कहा। हालांकि, कोई जवाब नहीं आया। कुछ समय बाद परिवार को प्रारब्ध की मौत की खबर मिली। बेटे की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अब परिजन मौत से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

जर्मनी जाकर मास्टर्स करना था सपना
प्रोफेसर अनुपम शुक्ला के अनुसार प्रारब्ध पढ़ाई में बेहद होनहार था। उसका सपना जर्मनी जाकर मास्टर्स की पढ़ाई करने का था। उसने आईईएलटीएस परीक्षा भी पहले प्रयास में पास की थी। आईआईएम सिरमौर में पढ़ाई करना भी प्रारब्ध के सपनों में शामिल था। उसने प्रवेश परीक्षा में पहली ही कोशिश में सफलता हासिल की थी। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई पूरी करने के बाद वह विदेश जाकर उच्च शिक्षा हासिल करेगा और अपने लिए एक उज्ज्वल करियर बनाएगा।

परिवार के मुताबिक प्रारब्ध के सामने आगे बढ़ने के कई अवसर थे। माता-पिता अपने इकलौते बेटे के भविष्य को लेकर बड़े सपने संजोए हुए थे। उसकी अचानक मौत ने परिवार के इन सभी सपनों को अधूरा छोड़ दिया।

अब बेटे के लिए इंसाफ की लड़ाई
प्रारब्ध की मौत के बाद उसके पिता अनुपम शुक्ला, मां प्रीति शुक्ला और चाचा श्याम शुक्ला गहरे सदमे में हैं। परिवार चाहता है कि मौत से जुड़े हर पहलू की निष्पक्ष तरीके से जांच हो और वास्तविक कारण सामने आए।

कश्मीर की वादियों में परिवार के साथ मुस्कुराता प्रारब्ध अब तस्वीरों और वीडियो में ही दिखाई देता है। कुछ महीने पहले जिन तस्वीरों में परिवार अपने बेटे के साथ भविष्य के सपने देख रहा था, वही तस्वीरें अब उनके लिए सबसे दर्दनाक याद बन गई हैं।

माता-पिता के सामने अब अपने इकलौते बेटे को खोने का गहरा दुख है और साथ ही यह सवाल भी है कि आखिर प्रारब्ध के साथ क्या हुआ। परिवार की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि उन्हें अपने बेटे की मौत का जवाब मिल सके।

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