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मां-बेटे का मिलन देखने आज उमड़ेगा उत्तर भारत

Wed, 09 Nov 2016 12:02 AM IST
संजय भारद्वाज/योगेंद्र अग्रवाल/अमर उजाला, श्री रेणुकाजी (सिरमौर)
संजय भारद्वाज/योगेंद्र अग्रवाल/अमर उजाला, श्री रेणुकाजी (सिरमौर) Updated Wed, 09 Nov 2016 12:02 AM IST
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renuka fair in sirmour himachal pradesh

चांदी से सुसज्जित भव्य पालकियां, हजारों भक्तों की भीड़, चारों ओर मां रेणुका और भगवान परशुराम का जय उद्घोष और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनियों से मां-पुत्र के पारंपरिक एवं भव्य मिलन की बेला आ गई है। आज श्री रेणुका जी तीर्थ स्थल में मां-पुत्र का मिलन होगा और इस अलौकिक पल के गवाह बनेंगे हजारों श्रद्धालु। 

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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह देव पालकियों को कंधा देकर मेले का विधिवत शुभारंभ कर शोभायात्रा की अगुवानी करेंगे। जामू मंदिर से लाई गई भगवान परशुराम की चांदी से जड़ित पालकी को वह कंधा देकर रेणुका जी झील के लिए रवाना करेंगे। जहां भगवान परशु राम का मां से भव्य मिलन होगा। अंतरराष्ट्रीय रेणुका मेला यह 6 दिन तक चलेगा। 
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मां रेणुका जी और भगवान परशुराम के इस ऐतिहासिक मिलन को देखने के लिए हिमाचल ही नहीं बल्कि उत्तर भारत से भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। एकादशी को रेणुका झील में पवित्र स्नान होगा। जिसमें उत्तर भारत विशेषकर पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड के हजारों श्रद्धालु पहुंचेंगे।
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जबकि पूर्णिमा के दिन होने वाले स्नान में अधिकतर हिमाचल के श्रद्धालु शरीक होंगे। श्री रेणुका जी मेला हिमाचल प्रदेश के प्राचीन मेलों में से एक है। यह मां-पुत्र के मिलन का प्रतीक है। जो हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की दशमी से पूर्णिमा तक उत्तरी भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री रेणुका में मनाया जाता है। इस वर्ष नौ से 14 नवंबर तक मनाया जा रहा है। 

मां से किया वादा निभाने आते हैं परशुराम
जनश्रुति के अनुसार प्राचीन काल में भृगुवंश के महर्षि ऋचिक के घर महर्षि जमदग्नि का जन्म हुआ था। जमदग्नि ऋषि तपे का टीला में रहते थे। उनके पास कामधेनु गाय थी। भगवान दत्तात्रेय से एक हजार भुजाओं का वरदान पाने वाले राजा अर्जुन एक दिन जमदग्नि के पास कामधेनु मांगने पहुंचे।

कामधेनु नहीं देने की विवशता बताने के बावजूद गुस्साए सहस्त्रबाहु (राजा अर्जुन) ने महर्षि जमदग्नि की हत्या कर दी। मां रेणुका शोकवश राम सरोवर में कूद गई। सरोवर ने मां रेणुका की देह को ढकने का प्रयास किया। जिससे इसका आकार स्त्री देह के समान हो गया। परशुराम अति क्रोध में सहस्त्रबाहु को ढूंढने निकले और सेना सहित सहस्त्रबाहु का वध कर दिया।


भगवान परशुराम ने अपनी योगशक्ति से पिता जमदग्नि तथा मां रेणुका को जीवित कर दिया। परशु राम ने माता रेणुका को वचन दिया था कि प्रतिवर्ष कार्तिक मास की देवोत्थान एकादशी को मिलने आएंगे। इसी बचन का पालन करने वह हर साल आते हैं। 

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