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Shimla News: शहर के 300 भवन मालिकों से नक्शों समेत रिकॉर्ड तलब, जांच में फंसे

Tue, 21 Jul 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jul 2026 11:59 PM IST
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Records, including building plans, summoned from 300 city building owners; they are now under scrutiny.
अमर उजाला एक्सक्लूसिव...
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नगर निगम ने पूछा, किसकी अनुमति पर रिहायशी क्षेत्रों में खोलीं दुकानें और ढाबे, जांच से शहर में मचा हड़कंप
नगर निगम दफ्तर पहुंचे पार्षद और शहरवासी
निगम को 27 जुलाई तक पूरा करना होगा सर्वेक्षण

अशोक चौहान
शिमला। राजधानी के रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति दुकानें, ढाबे और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चला रहे 300 भवन मालिकों से नगर निगम ने रिकॉर्ड तलब कर लिया है। निगम ने इन्हें नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर नक्शे समेत जवाब देने को कहा है।

पांच दिन के भीतर नगर निगम की टीमों ने 18 वार्डों में जाकर 300 से ज्यादा भवन मालिकों को यह नोटिस थमाए हैं। इसमें पूछा है कि आखिर किसकी अनुमति लेकर रिहायशी क्षेत्र में बने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं। इसका जवाब नक्शे समेत नगर निगम की वास्तुकार शाखा में जमा करना होगा करनी होंगी। अचानक नोटिस जारी करने और रिकॉर्ड तलब किए जाने से शहर में हड़कंप मच गया है। लोग पार्षदों से राहत की मांग कर रहे हैं। निगम के कई पार्षद भी मंगलवार को नगर निगम कार्यालय पहुंचे और इस कार्रवाई को लेकर जानकारी ली। समरहिल वार्ड के पार्षद वीरेंद्र ठाकुर ने पूछा कि निगम किस नियम के तहत यह कार्रवाई कर रहा है। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में कई लोग दशकों पुरानी दुकानें चला रहे हैं। ऐसे में अब निगम इस मामले में क्या कार्रवाई करेगा।
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निगम प्रशासन ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है। इसके लिए शहर के रिहायशी क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया जा रहा है। इनमें बने कितने भवनों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही हैं, इसे चिह्नित किया जा रहा है। नगर निगम आयुक्त सचिन कंवल ने कहा कि 27 जुलाई तक यह सर्वे जारी रहेगा। इसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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राहत के आसार कम, बंद करना होगा कारोबार
नगर निगम के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में तीन महीने के भीतर रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगमों को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। शिमला शहर में जांच के बाद जिन रिहायशी इलाकों में दुकानें, ढाबे खुले मिलेंगे, उन्हें बंद करना होगा। लोगों की परेशानी इसलिए भी बढ़ने वाली है क्योंकि यह लोग चेंज ऑफ लैंड यूज के तहत भी नगर निगम से अनुमति नहीं ले पाएंगे। रिहायशी इलाकों में इसकी मंजूरी लेने की प्रक्रिया काफी जटिल है। निगम रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां चलाने की छूट नहीं देता। यदि मंजूरी देनी भी है तो भवन मालिक को फायर एनओसी लेने समेत नक्शा पास करवाने जैसी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।


सड़कों से सटे भवनों को राहत
शहर में सड़कों से सटे भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर मालिकों को राहत मिल सकती है। नगर निगम के अनुसार, सड़क से सटे इलाके या भवन पहले ही डेवलपमेंट प्लान में कमर्शियल एरिया के रूप में दर्शाए हैं। इन पर आदेशों का असर नहीं होगा। हालांकि जो रिहायशी कॉलोनियां हैं, वहां भवनों में चल रही दुकानों और ढाबों को बंद करना पड़ सकता है।



चार टीमें कर रहीं जांच
रिहायशी क्षेत्रों में कुल कितनी दुकानें, ढाबे आदि खुले हैं, इसकी जानकारी नगर निगम ने कूड़ा शुल्क और टैक्स शाखा से ली है। इनकी आईडी से नगर निगम के पास पुख्ता आंकड़ा उपलब्ध हो गया है। अब चार टीमें इन आईडी और डेवलपमेंट प्लान के मैप को साथ लेकर वार्डों का निरीक्षण कर रही हैं। इसमें जो भवन बंद मिलेंगे, उन्हें नोटिस जारी किए जाएंगे। ऐसे में जो लोग सही जानकारी नहीं देंगे और रिकॉर्ड छिपाएंगे, उन्हें कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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