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हिमाचल : आतंक पर आस्था भारी, साल के पहले दिन रिकॉर्ड पौने दो लाख श्रद्धालु पहुंचे

Sun, 02 Jan 2022 01:17 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 02 Jan 2022 01:17 AM IST
सार

नयनादेवी में सबसे ज्यादा 70 हजार, चिंतपूर्णी में 27, ज्वालाजी में 25, चामुंडा में 20 और बज्रेश्वरी देवी मंदिर में 5 हजार हुए नतमस्तक।

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Record two and a half lakh devotees reached Himachal on the first day of the year
चिंतपूर्णी में श्रद्धालु... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश में नववर्ष के पहले दिन आतंक पर आस्था भारी पड़ी है। शनिवार को प्रदेश की प्रसिद्ध शक्तिपीठों और सिद्धपीठ में पौने दो लाख के करीब रिकॉर्ड श्रद्धालुओं ने दर्शन कर साल के पहले दिन का आगाज किया। इससे पहले एक से डेढ़ लाख श्रद्धालु ही नव वर्ष के पहले दिन मंदिरों में पहुंचते थे।

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राजधानी शिमला में नववर्ष की पूर्व संध्या पर भले ही आतंकी संगठनों की धमकी के बाद हड़कंप मच गया हो या वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ से 12 लोगों की जान चली गई, लेकिन सूबे की शक्तिपीठों में श्रद्धालु बेखौफ सुबह से ही लाइनों में लगे रहे। देर शाम तक मंदिरों में लाइनें लगी रहीं। हालांकि, वैष्णो देवी मंदिर में भगदड़ के बाद मंदिरों की सुरक्षा और बढ़ा दी गई है। श्रद्धालुओं को लाइनों में नियंत्रित करके ही भेजा गया। पुलिस जवानों की दिनभर नजर रही। 
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प्रसिद्ध शक्तिपीठ नयनादेवी में सबसे ज्यादा 70 हजार श्रद्धालुओं ने माथा टेका। यहां शुक्रवार रात डेढ़ बजे ही मंदिर के कपाट खोल दिए गए। मंदिर में शाम तक लाइनें लगी रहीं। ज्वालाजी में नववर्ष पर 25 हजार श्रद्धालु नतमस्तक हुए, जबकि चामुंडा में 20 हजार, कांगड़ा मंदिर में 5 हजार, चिंतपूर्णी में 27 हजार और सिद्धपीठ बाबा बालकनाथ मंदिर दियोटसिद्ध में 25 हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया। 
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ज्वालामुखी मंदिर में सुबह पांच बजे से श्रद्धालुओं के लिए कपाट खुल गए थे। यहां कोरोना के खौफ से बंद किए गए लंगर को 21 माह बाद दोबारा शुरू किया गया। हालांकि श्रद्धालुओं को कोरोना के नियमों को दरकिनार करते भी देखा गया। कई जगह एसओपी का पालन नहीं किया गया। श्रद्धालु बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का नियम तोड़ते रहे।

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