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किसान-बागवान संगठनों को एक मंच पर लाकर छेड़ी जाएगी निर्णायक लड़ाई: सिंघा

Sat, 28 Aug 2021 08:37 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला नेटवर्क, ठियोग/शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, ठियोग/शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 28 Aug 2021 08:37 PM IST
सार

विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि सभी किसान-बागवान संगठनों से आह्वान किया कि अपने झंडे-डंडे छोड़कर एक मंच पर आएं ताकि किसानी और बागवानी को बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि सोमवार को शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित होने वाले संयुक्त किसान मंच के अधिवेशन में आगामी आंदोलन का खाका तय किया जाएगा।

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rakesh Singha said that A decisive battle will be started by bringing farmer-horticultural organizations on one platform
किसान अधिवेशन में विधायक राकेश सिंघा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकार की अनदेखी के कारण किसान-बागवान पीड़ा में हैं। प्रदेश के सभी किसान-बागवान संगठनों को एक मंच पर लाकर अब निर्णायक लड़ाई लड़ी जाएगी। शनिवार को ठियोग में आयोजित किसान अधिवेशन के दौरान माकपा नेता और ठियोग कुमारसैन के विधायक राकेश सिंघा ने यह बात कही। उन्होंने प्रदेश के सभी किसान-बागवान संगठनों से आह्वान किया कि अपने झंडे-डंडे छोड़कर एक मंच पर आएं ताकि किसानी और बागवानी को बचाया जा सके। उन्होंने बताया कि सोमवार को शिमला के कालीबाड़ी हाल में आयोजित होने वाले संयुक्त किसान मंच के अधिवेशन में आगामी आंदोलन का खाका तय किया जाएगा।

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 सिंघा ने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी कर नए कृषि कानून निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए लागू किए जा रहे हैं। सेब सीजन के दौरान बागवानों की परेशानियों को लेकर सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। सेब को लेकर भाजपा सरकारों का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। 1987 में किसान आंदोलन के दौरान जब सेब का समर्थन मूल्य 10 रुपये मांगा गया तो महज डेढ़ रुपये दिया गया। कोटगढ़ में किसानों पर गोलियां चलाई गईं जिसमें तीन किसान शहीद हुए। 2007 में भाजपा सरकार ने सेब से शराब बनाने का झूठा दिलासा देकर गुम्मा कार्टन फैक्टरी कौड़ियों के भाव बेच दी। आज बागवानों को सस्ते कार्टन के लिए जूझना पड़ रहा है।
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मौजूदा सरकार ने खाद और दवाओं पर सब्सिडी खत्म कर दी, कार्टन के रेट 20 रुपये तक बढ़ा दिए। सेब बेचने के लिए क्रेट उपलब्ध करवाने का जुमला छोड़ा गया अब कहीं भी क्रेट नहीं दिख रही। सरकार की एजेंसी एपीएमसी का खुले तौर पर पैसा उगाही के लिए प्रयोग हो रहा है। शोघी और परवाणू बैरियर पर अपना सेब बाहर बेचने ले जा रहे बागवानों से अवैध वसूली हो रही है। आढ़तियों के साथ मिलीभगत कर ट्रक ऑपरेटरों से वसूली की जा रही है। भट्ठाकुफर फल मंडी पर एक साल पहले हुए भूस्खलन का मलबा अब तक न हटना एपीएमसी के विफलता का सबसे बड़ा सबूत है। षड्यंत्र के तहत भट्ठाकुफर फल मंडी को फेल करने का प्रयास किया जा रहा है।  
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भारद्वाज हमें न सिखाएं बागवानी का अर्थशास्त्र
सिंघा ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज पर जमकर निशाना साधा। कहा कि भारद्वाज हमें बागवानी का अर्थशास्त्र न समझाएं। बागवानों से लूट-खसोट की नीति जबसे शुरू हुई है, हम तब से सारे अर्थशास्त्र जानते हैं। आरोप लगाया कि ओडी में मिलीभगत कर एचपीएमसी का सीए स्टोर हैदराबाद की निजी कंपनी को बेहद कम किराये पर दे दिया है जबकि इस पर बागवानों का पहला हक है। ओलावृष्टि और बेमौसमी बर्फबारी से हुए नुकसान के बाद भारद्वाज ने आंसू तो खूब बहाए पर बागवानों को एक नए पैसे की मदद नहीं मिली। सरकार अपनी नाकामी स्वीकार करे और निजी कंपनियों की हिमायती न बने।

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