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Inspiring Story: बचपन में खो दिए माता-पिता; दादी ने पढ़ाया, अब पोती ने चमकाया नाम; जानें संघर्ष की कहानी
Sun, 14 Jun 2026 12:16 PM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 14 Jun 2026 12:16 PM IST
सार
हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड की मेरिट सूची में स्थान बनाने वाली हमीरपुर की छात्रा राघवी की सफलता के पीछे उसकी दादी सीता देवी का संघर्ष छिपा है। बचपन में माता-पिता को खोने के बाद दादी ने पेंशन के सहारे उसका पालन-पोषण और पढ़ाई करवाई। शिमला में सम्मान समारोह के दौरान पोती को सम्मानित होते देख दादी की आंखें खुशी से भर आईं। पढ़ें पूरी खबर...
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दादी के साथ राघवी
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
एनडीपी गलोड़ हमीरपुर की दसवीं कक्षा की छात्रा राघवी को स्टेज पर सम्मानित होते देखने के लिए उसकी 70 वर्षीय दादी सीता देवी भी पीटरहॉफ पहुंची थीं। राघवी ने दसवीं की मेरिट सूची में दसवां स्थान पाने पर सम्मान पाया। सम्मान पाने के बाद दादी सीता देवी के मुंह से निकला इन्ने इन्ने थे, तालू इनां दे मां-बाप नी रहे, मैं ही पाले, पढ़ाए लिखाए, आज पोतिये अपणा कने मेरा भी नाम रोशन करीता...। यह कहते हुए दादी की आंखें खुशी से भी नम हो गईं।
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सीता देवी ने कहा कि उनके पति पुलिस में थे, उनके जाने के बाद, जो पेंशन मिलती है, उसी से पोता, पोती का अपना खर्च पूरा करती हूं। पोती राघवी पढ़ लिखकर पुलिस ऑफिसर बनना चाहती है। उन्होंने बताया कि इन दोनों बच्चों को कोई होश नहीं था, जब इनके माता-पिता इस दुनिया को छोड़कर इनको मेरी गोद में छोड़ कर चले गए थे। पोती ने मेहनत कर आज ये सफलता हासिल की। मेरी बाजू में दर्द रहती है, पोती पढ़ाई के साथ घर का भी पूरा काम करती है।
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दादी इसरो के साथ आरुषि
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
64 वर्षीय दादी इसरो सिरमौर से आईं आरुषि को सम्मान लेते देखने
दसवीं की बोर्ड में मेरिट में दूसरे स्थान पाने पर जिला सिरमौर स्कूल की छात्रा आरुषि की 64 वर्षीय दादी बोली, पोती को ये मौका बार-बार नहीं मिलेगा। उसे पुरस्कार मिलना था, तो बेटे और पोते के साथ मैं भी उसके इस कार्यक्रम को देखने आ गई। आरुषि के समारोह स्थल से बाहर निकलने पर दादी ने उसे गले से लगाया और उसे कहा शाबाश बेटा।
दसवीं की बोर्ड में मेरिट में दूसरे स्थान पाने पर जिला सिरमौर स्कूल की छात्रा आरुषि की 64 वर्षीय दादी बोली, पोती को ये मौका बार-बार नहीं मिलेगा। उसे पुरस्कार मिलना था, तो बेटे और पोते के साथ मैं भी उसके इस कार्यक्रम को देखने आ गई। आरुषि के समारोह स्थल से बाहर निकलने पर दादी ने उसे गले से लगाया और उसे कहा शाबाश बेटा।
दादा के साथ श्रुति
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
खुद करो और आगे बढ़ो…... दिवंगत पिता की प्रेरणा ने श्रुति को बनाया टॉपर
खुद करो और आगे बढ़ो… पिता की इस सीख को याद करते हुए नालागढ़ की बोर्ड टॉपर श्रुति ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और सफलता हासिल की। माता-पिता को खोने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। श्रुति की मां का साथ तब छूट गया था जब वह मात्र डेढ़ वर्ष की थीं। इसके बाद पिता, दादा और दादी ने ही उन्हें मां जैसा स्नेह और सहारा दिया, लेकिन वर्ष 2024 में एक और बड़ा दुख सामने आया जब पिता की सांप के काटने से मृत्यु हो गई। इस घटना ने श्रुति और उनकी बहन को गहरा आघात पहुंचाया। इसके बावजूद श्रुति ने हार नहीं मानी।
खुद करो और आगे बढ़ो… पिता की इस सीख को याद करते हुए नालागढ़ की बोर्ड टॉपर श्रुति ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपनी पढ़ाई जारी रखी और सफलता हासिल की। माता-पिता को खोने के बाद भी उसने हिम्मत नहीं हारी और अपने सपनों को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही है। श्रुति की मां का साथ तब छूट गया था जब वह मात्र डेढ़ वर्ष की थीं। इसके बाद पिता, दादा और दादी ने ही उन्हें मां जैसा स्नेह और सहारा दिया, लेकिन वर्ष 2024 में एक और बड़ा दुख सामने आया जब पिता की सांप के काटने से मृत्यु हो गई। इस घटना ने श्रुति और उनकी बहन को गहरा आघात पहुंचाया। इसके बावजूद श्रुति ने हार नहीं मानी।
उन्होंने दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई डीएवी छियाछी से पूरी की और कठिन परिश्रम करते हुए लगभग 12 घंटे तक पढ़ाई कर बोर्ड परीक्षा में चौथा स्थान प्राप्त किया। अब श्रुति ने नालागढ़ में वाणिज्य संकाय में प्रवेश लिया है और सीए बनने का सपना है।परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण 82 वर्षीय दादा राम सिंह खेती-बाड़ी कर घर का खर्च मुश्किल से चला रहे हैं। इसी के साथ दो पोतियों की पढ़ाई की जिम्मेदारी भी उनके कंधों पर है। ऐसे में नालागढ़ की हेल्प द गर्ल्स संस्था ने श्रुति की आगे की पढ़ाई की जिम्मेदारी लेने का निर्णय लिया है, जिससे उन्हें बड़ी राहत मिली है।