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Shimla News: सड़क हादसों के मृतकों की अल्कोहलिक रिपोर्ट पर सवाल

Thu, 22 Jan 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 11:59 PM IST
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Questions raised on the alcoholic report of road accident victims
सवालों के घेरे में सड़क हादसों के मृतकों की अल्कोहलिक रिपोर्ट
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एक्सकलूसिव

अब डीनए जांच से सामने आएगी सच्चाई, परिजनों का दावा-हादसों में मारे गए दोनों लोग नहीं पीते थे शराब, जांच में भी नहीं पाए गए आदी
जिले में वर्ष 2024 और 2025 में हुए थे दोनों सड़क हादसे का शिकार
सैंपल की जांच में शराब के सेवन की हुई थी पुष्टि, अब फिर होगी जांच
देवेंद्र ठाकुर
शिमला। जिला शिमला में दो अलग-अलग सड़क हादसों में दो लोगों की जान चली गई लेकिन जब दोनों के ब्लड और बिसरा सैंपल की रिपोर्ट आई तो इससे नई बहस छिड़ गई। पुलिस की जांच और परिजनों तथा दोस्तों से पूछताछ में दोनों ही व्यक्तियों के शराब का आदी नहीं होने की बात सामने आई है, वहीं सैंपल रिपोर्ट इससे कुछ अलग कहानी बयां कर रही है।
शिमला पुलिस ने इस विवाद को सुलझाने के लिए अब दोनों सैंपलों की डीएनए प्रोफाइलिंग करवाने का फैसला लिया है। पहला मामला 18 सितंबर 2025 का है, जब थाना सदर के तहत शिमला के साथ लगते ग्रामीण क्षेत्र में स्कूटर हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई। कुछ समय के बाद ब्लड सैंपल की रिपोर्ट सीएफएसएल जुन्गा से आई तो उसमें 42.65 एमजी शराब की मात्रा पाई गई। रिपोर्ट आने के बाद परिजन यह विश्वास करने को तैयार नहीं थे कि वह शराब का सेवन करता था। पुलिस ने दोस्तों और परिचितों से पूछताछ की लेकिन इसको लेकर सभी ने इन्कार किया। दूसरा मामला वर्ष 2024 का है जब संजौली कॉलेज के पास बाइक हादसे में एक युवक की जान चली गई। इस मामले में ब्लड और बिसरा सैंपल सीएफएल जुन्गा भेजे गए। जांच रिपोर्ट में 184.56 एमजी शराब की मात्रा पाई गई, जोकि सामान्य से बहुत अधिक है। इस मामले में भी परिजन यह मानने तैयार नहीं थे कि उनका बेटा शराब का सेवन करता है।
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पुलिस जांच में भी यह बात पुष्टि नहीं हो सकी कि युवक शराब पीने का आदी था। सैंपल को दोबारा जांच के लिए सीएफएसएल चंडीगढ़ भेजा गया। इसमें 149.50 एमजी शराब की मात्रा होने की पुष्टि हुई। परिजनों को शक है कि सैंपल में छेड़छाड़ तो नहीं हुई है। पुलिस ने अब सच्चाई का पता लगाने के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दोनों ही मामलों ने सैंपल लेने और जांच में छेड़छाड़ की संभावनाओं को बल दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक सैंपल कंटैमिनेशन (बाहरी अवांछित पदार्थ मिलना) होने से भी इस तरह की गलती होने की आशंका रहती है। इसके अलावा मिसलैबलिंग या स्विचिंग ऑफ सैंपल होने से भी इस तरह की गलती हो सकती है। डीएनए प्रोफाइलिंग न केवल सच्चाई उजागर करती है बल्कि भविष्य की जांचों में सैंपल हैंडलिंग के मानकों को बेहतर बनाने में मदद भी करती है।
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केमिकल रिएक्शन से शरीर में होता अल्कोहल का उत्पादन
सीएफएसएल के विशेषज्ञों के मुताबिक मौत के बाद शरीर में कई प्रकार के केमिकल रिएक्शन होते हैं। वैज्ञानिक रूप से पोस्टमॉर्टम माइक्रोबियल फर्मेंटेशन या पुट्रीफैक्शन के दौरान अल्कोहल उत्पादन होता है। इससे एथेनॉल (शराब) बनने लगता है। यह प्रक्रिया फोरेंसिक टॉक्सिकोलॉजी में बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह ब्लड अल्कोहल कंसंट्रेशन (बीएसी) को गलत तरीके से बढ़ा सकती है। इससे लगता है कि व्यक्ति ने मौत से पहले शराब पी थी जबकि वास्तव में ऐसा नहीं होता। हालांकि इसकी मात्रा भी बहुत ज्यादा नहीं होती है।




कोट
सैंपल लेते समय कई ऐसे मापदंड होते हैं, जिसको लेकर समय-समय पर एडवाइजरी जारी की जाती है। सैंपल लेते समय भी लापरवाही होने से ऐसा होने की आशंका रहती है। लैब में सैंपल की जांच का कार्य पूरी तरह से मशीन द्वारा ही किया जाता है। ऐसे में गलती की आशंका काफी कम होती है।
डॉ. मीनाक्षी महाजन, निदेशक, सीएफएसएल जुन्गा
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