मंत्री की कार्यशैली पर सवाल, कम कर दी IFS की ग्रेडिंग
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वन मंत्री की कार्यशैली इन दिनों विभागीय अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हाल ही में वन विभाग के कई आईएफएस अधिकारियों की परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट (पीएआर) लिखी जा रही थी। अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर वन विभाग के पीसीसीएफ को भेज दी। पीसीसीएफ ने अधिकारियों की कार्यशैली के अनुसार ग्रेडिंग कर रिपोर्ट प्रमुख सचिव वन को बढ़ा दी।
प्रमुख सचिव वन ने भी अधिकारियों के कामकाज के हिसाब से उनकी ग्रेडिंग कर दी। खराब कार्यशैली के चलते कुछ अधिकारियों की ग्रेडिंग कम रखी गई, जबकि कई अधिकारियों को पीसीसीएफ और प्रमुख सचिव ने 8 से 9 तक ग्रेडिंग दी। रिपोर्ट पर टिप्पणी लिखने के लिए जब फाइलें वन मंत्री के पास पहुंचीं तो उन्होंने अच्छी ग्रेडिंग वाले अधिकारियों की ग्रेडिंग 6 और 7 कर दी।
यही नहीं, रिपोर्टिंग अफसर व रिव्यू अफसर से खराब ग्रेडिंग पाने वाले अधिकारियों की ग्रेडिंग को 9 तक बढ़ा दिया। चूंकि, अपनी पीएआर में मिली ग्रेडिंग और टिप्पणियों को अधिकारियों को पढ़ने के लिए दिया जाता है। ऐसे में जब रिपोर्ट पर मंत्री की ग्रेडिंग अधिकारियों ने देखी तो वह खासे नाराज हो गए।
विभाग का प्रमुख होने के नाते हर अधिकारी की कार्यशैली का रिव्यू करना मेरा फर्ज है। इसलिए हर अधिकारी को उसके काम के हिसाब से अंक दिए गए हैं। इस बात का ध्यान रखा गया है कि किसी के साथ अन्याय न हो। -ठाकुर सिंह भरमौरी, वन मंत्री
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए जरूरी होती है अच्छी ग्रेडिंग
हर अधिकारी की पीएआर में अधिकारी को अपनी उपलब्धियां बतानी होती है। इसके बाद रिपोर्टिंग अफसर उसकी कार्यशैली और उसके काम का आंकलन कर ग्रेडिंग देता है। फिर रिव्यू अफसर भी उसपर अपनी टिप्पणी व ग्रेडिंग देता है। रिपोर्ट के आधार पर ही उसके
प्रमोशन तथा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना निर्भर होता है। चूंकि, केंद्रीय प्रतिनियुक्त पर जाने के लिए अधिकारियों की एसीआर में कम से कम 9 ग्रेड होना आवश्यक होता है। ऐसे में मंत्री की ओर से ग्रेड कम करने तथा नेगेटिव टिप्पणी लिखने की वजह से अधिकारियों में खासी नाराजगी है।
मंत्री की ग्रेडिंग नहीं दी जाती तवज्जो
सूत्रों की मानें तो केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों की ग्रेडिंग तथा कमेंट को तवज्जो दिया जाता है। सामान्य तौर पर केंद्रीय प्रतिनियुक्ति करने वाला पैनल रिपोर्टिंग व रिव्यू अफसरों की टिप्पणी के आधार पर नियुक्ति के लिए निर्णय
करता है। ऐसे में मंत्री ग्रेडिंग से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति या प्रमोशन पर कोई असर नहीं पड़ता। केंद्र की इस चयन प्रक्रिया के चलते अधिकारियों में मंत्री की यह कार्यशैली चर्चा का विषय बनी हुई है।