बाहरी राज्यों से दस वर्ष पुराने डीजल वाहन खरीदने पर रोक
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हिमाचल सरकार ने बाहरी राज्यों से 10 साल पुराने डीजल वाहनों की खरीद पर रोक लगा दी है। ऐसे वाहनों का एक जनवरी 2016 से प्रदेश में पंजीकरण नहीं होगा। डीजल के नए वाहनों का पंजीकरण शुल्क भी दोगुना करने का निर्णय लिया है। उधर सरकार ने सीएनजी और इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन देने को बड़ी छूट दी है।
इन वाहनों की खरीद पर अब न तो पंजीकरण शुल्क लिया जाएगा और न ही रोड टैक्स लगेगा। अगले साल से 15 साल पुरानी कॉमर्शियल मैक्सी कैब भी नहीं चल सकेंगी। हिमाचल परिवहन निगम की नौ साल से अधिक पुरानी बसें भी सड़क पर नहीं दिखेंगी। एनजीटी के निर्देशों पर सूबे में प्रदूषण को कम करने के लिए प्रदेश सरकार ने उक्त कड़े फैसले लिए हैं।
सीएनजी डिपो, इलेक्ट्रॉनिक पावर स्टेशन खुलेंगे
सोमवार को शिमला में परिवहन मंत्री जीएस बाली ने प्रेसवार्ता में कहा कि दिल्ली और अन्य राज्यों में पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। ऐसे में इन राज्यों के लोग अपने वाहनों को सस्ते दामों में बेच रहे हैं। हिमाचल में ज्यादा प्रदूषण फैलाने वाले वाहन न पहुंचें, इसके चलते बाहरी राज्यों के 10 साल पुराने वाहनों का पंजीकरण न करने का फैसला लिया गया है। आरटीओ के अलावा अब परिवहन विभाग के आयुक्त को भी पंजीकरण की शक्तियां दी गई हैं।
जीएस बाली ने कहा कि धर्मशाला, मनाली, शिमला और डलहौजी में सीएनजी डिपो खुलेंगे। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक वाहनों के लिए 25 पावर स्टेशन भी चयनित किए जाएंगे, जहां पर वाहनों की बैटरी चार्ज की जा सकेगी। केंद्र सरकार से पावर प्वाइंट के लिए निशुल्क बिजली की मांग की जाएगी।
41.25 करोड़ से खरीदी जाएंगी 25 इलेक्ट्रॉनिक बसें
प्रदेश सरकार हिमाचल में जल्द 25 इलेक्ट्रॉनिक बसें चलाने जा रही है। ये बसें सात से लेकर 30 सीटर होंगी। सात सीटर मैक्सी कैब शहरों में नजर आएंगी। एक बस की कीमत एक करोड़ 65 लाख रुपये होगी। इसका 90 फीसदी खर्च केंद्र सरकार, जबकि 10 फीसदी प्रदेश सरकार वहन करेगी।
इसके अलावा परिवहन निगम के बेड़े में 15 नई वोल्वो बसें खरीदी जाएंगी। प्रदेश सरकार ने हिमाचल में डीजल वाले ऑटो पर पहले ही प्रतिबंध लगाया है। प्रदेश सरकार ने अब फैसला लिया है कि इलेक्ट्रॉनिक व सीएनजी ऑटो चलाने के लिए भी परमिट जारी किए जाएंगे।