Shimla: परवाणू-शिमला फोरलेन पर 15.15 हेक्टेयर भूमि पर बनेंगे सार्वजनिक शौचालय, हाईकोर्ट को दी जानकारी
हाईकोर्ट ने एनएचएआई को आदेश दिए थे कि वह तीन माह की भीतर सड़क किनारे शौचालय इत्यादि सुविधाएं प्रदान करने के लिए डीपीआर तैयार करें, ताकि बरसात से पहले इसका निर्माण शुरू किया जा सके।
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परवाणू-शिमला फोरलेन पर 15.15 हेक्टेयर भूमि पर सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। इसके लिए वन भूमि को राष्ट्रीय राजमार्ग अथॉरिटी को स्थानांतरित किया गया है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट को दी। अदालत को बताया गया कि अभी इस पर जून की बैठक में अंतिम निर्णय लिया जाएगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 28 जून को निर्धारित की है। हाईकोर्ट ने एनएचएआई को आदेश दिए थे कि वह तीन माह की भीतर सड़क किनारे शौचालय इत्यादि सुविधाएं प्रदान करने के लिए डीपीआर तैयार करें, ताकि बरसात से पहले इसका निर्माण शुरू किया जा सके। बता दें कि फोरलेन के निर्माण में हो रही देरी पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है।
नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने अदालत के ध्यान में लाया था कि राजस्व विभाग की ओर से निशानदेही न करने के कारण फोरलेन निर्माण में देरी हो रही है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने परवाणू से कैथलीघाट तक फोरलेन को दिसंबर 2023 तक पूरी तरह से चालू करने का बयान हाईकोर्ट के समक्ष दिया था। ज्ञात रहे कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का कालका-शिमला फोरलेन ड्रीम प्रोजेक्ट था, लेकिन पिछले तीन सालों से कैथलीघाट-ढली के हिस्से का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। पहले भूमि अधिग्रहण के चलते काम लटका रहा। कालका से कैथलीघाट तक निर्माण कार्य अवैध कब्जों के कारण पूरा नहीं हो रहा है। कैथलीघाट से ढली तक 28.4 किमी लंबे फोरलेन के हिस्से का कार्य दो पैकेजों में तय किया गया है। इस पर 3,716.26 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। फोरलेन के दूसरे पैकेज के फोरलेन निर्माण के लिए 1956.26 करोड़ बजट की स्वीकृति दी गई है।
नेउगल नदी के किनारे कूड़ा डालने पर हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान
बताया गया है कि पूर्व मंत्री रविंद्र सिंह रवि की अध्यक्षता वाले एक स्थानीय एनजीओ धौलाधार सेवा समिति ने नगर निगम पालमपुर की ओर से न्यूगल नदी के तट पर कचरा डंप करने पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। खबर में बताया गया है कि नदी के तट पर कचरे की डंपिंग से न केवल पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है, बल्कि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर प्रदूषण भी हुआ है। कचरे से उठ रही दुर्गंध ने भी लोगों को परेशान किया है। यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई तो स्थिति और भी खराब हो सकती है। कचरे ने नदी के पीने के पानी को गंभीर रूप से प्रदूषित कर दिया है।
रोहड़ू सिविल अस्पताल में पैरा मेडिकल स्टाफ के खाली पदों पर हाईकोर्ट सख्त
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रोहड़ू सिविल अस्पताल में नर्सों और फार्मासिस्ट के खाली पदों पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने मुख्य सचिव सहित स्वास्थ्य सचिव को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ मामले की सुनवाई 25 मई को निर्धारित की है। अमर उजाला में छपी खबर पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने जनहित में याचिका दर्ज करते हुए निदेशक स्वास्थ्य और बीएमओ रोहड़ू को भी प्रतिवादी बनाया है। रोहड़ू में मरहम पट्टी के लिए भटक रहे मरीज शीर्षक से छपी खबर में बताया गया है कि सिविल अस्पताल रोहड़ू में पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी के कारण मरीज मरहम पट्टी के लिए भटक रहे हैं।
बताया गया है कि अस्पताल में हर दिन 400 से 500 ओपीडी होती है और मरीजों को मरहम पट्टी की जरूरत रहती है। अस्पताल में अभी नर्सों के 31 पदों में से 17 खाली चल रहे हैं। इसी तरह फार्मासिस्ट के नौ पदों में से सिर्फ तीन पद ही भरे गए हैं। खबर में उजागर किया गया है कि यदि कोई पैरा मेडिकल स्टाफ कार्य दिवस के दौरान छुट्टी पर जाता है तो चिकित्सकों को खुद ही मरहम पट्टी करनी पड़ती है। अस्पताल में इन पदों को भरने के लिए स्थानीय विधायक से कई बार गुहार लगाई गई है लेकिन, अभी तक स्वास्थ्य विभाग ने इन पदों को भरने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए हैं।