दूसरे प्रदेशों की अर्थव्यवस्था मजबूत कर रहा है हिमाचलियों का पैसा
हिमाचल प्रदेश के बैंकों में जमा पूंजी बढ़ने और व्यापारिक तथा आर्थिक गतिविधियों के लिए लोन लेने में लोगों की रुचि न बढ़ने से जयराम सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसी चिंता को देखते हुए सरकार अगले हफ्ते इस परेशानी से निपटने के लिए मंथन करने जा रही है।
मुख्यमंत्री और तमाम सचिवों की इस बैठक में यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि ऐसा क्यों हो रहा है और लोगों को सरकारी नौकरी के बजाय लोन लेकर खुद के बूते अपने, अपने आसपास और प्रदेश को मजबूत करने के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जा सकता है। कुछ समय में प्रदेश में स्थित बैंकों में एडवांस और डिपॉजिट के बीच अंतर बढ़ने लगा है।
एडवांस जहां कम हो रहा है, वहीं लोग बैंकों में पूंजी जमा करने में ज्यादा जोर दे रहे हैं। चूंकि राष्ट्रीयकृत बैंक हिमाचलियों के इसी पैसे को दूसरे प्रदेशों में लोन के रूप में दे रहे हैं, जिससे उन प्रदेशों में तो आर्थिक गतिविधियां हो रही हैं, लेकिन हिमाचल इससे अछूता है।
ऐसे में प्रदेश में गतिविधियां न होने से पूरा दबाव सरकार पर ही है कि वह लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित करे। चूंकि सरकार के पास भी सीमित संसाधन हैं, ऐसे में वह लोगों से भी खुद के पैरों पर खड़े होने की उम्मीद कर रही है, लेकिन जिस तरह लोग आर्थिक गतिविधियों में भाग नहीं ले रहे उससे सरकार की चिंताएं बढ़ा दी है।
अब इसी चिंता को दूर करने के लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में अगले हफ्ते बैठक होने जा रही है जिसमें लोगों की भागीदारी बढ़ाने और सरकार के सहयोग की जानकारी लोगों तक पहुंचाने को लेकर रणनीति पर चर्चा होगी।