धौलासिद्ध जलविद्युत परियोजना में निवेश का प्रस्ताव मंजूर, 1000 को मिलेगा रोजगार
भारत सरकार ने 66 मेगावाट की धौलासिद्ध जलविद्युत परियेाजना के लिए 687 करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसमें केंद्र सरकार की 21.6 करोड़ की सहायता राशि शामिल है। हमीरपुर जिले में इसका निर्माण किया जाएगा। 54 माह के भीतर एसजेवीएन इसका निर्माण पूरा करेगा। परियोजना शुरू होने पर सालाना 304 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। परियोजना में एक हजार लोगों को रोजगार मिलेगा। एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा ने बताया है कि इस परियोजना की परिकल्पना 27 अक्तूबर 2008 को की गई थी।
तब इस परियोजना के लिए एसजेवीएन तथा हिमाचल प्रदेश सरकार के बीच एमओयू साइन किया गया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उपस्थिति में इन्वेस्टर मीट में इस परियोजना के लिए पृथक एकल आधार पर एमओयू साइन किया गया था। रन-ऑफ-द-रिवर किस्म की यह परियोजना सुजानपुर से लगभग 10 किलोमीटर डाऊन स्ट्रीम में धौलासिद्ध में ब्यास नदी पर है। इसमें एक 195 मीटर लंबा, 70 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी डैम होगा। इस बांध से लगभग 20 किलोमीटर एक जलाशय का निर्माण होगा। परियोजना प्रभावित परिवारों को दस साल की अवधि के लिए प्रति माह 100 यूनिट बिजली उपलब्ध करवाई जाएगी।
सौर ऊर्जा से रोशन होगी चंबा जिला की पांगी घाटी
चंबा जिले का जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी जल्द सौर ऊर्जा से रोशन होगा। घाटी के बीपीएल परिवारों के एक हजार घरों में 250 वॉट क्षमता के आफ ग्रिड सोलर पावर प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इस प्लांट के लगने से चार से पांच घंटे तक नौ वॉट की पांच एलईडी ट्यूब लाइटें जलेंगी। चार घंटे तक टीवी भी चलेगा। इस कार्य के लिए हिमऊर्जा तीन करोड़ 83 लाख रुपये खर्च करेगा। हिम ऊर्जा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रूपाली ठाकुर ने बताया कि सरकार दूरस्थ व जनजातीय क्षेत्रों के विकास पर विशेष ध्यान दे रही है। हिमऊर्जा के माध्यम से सरकार इस वित्तीय वर्ष में चंबा जिले के पांगी उपमंडल में गरीबी रेखा से नीचे के एक हजार परिवारों के घरों में 250 वाट क्षमता प्रत्येक के ऑफ ग्रिड पावर प्लांट स्थापित करेगी।
इस सोलर प्लांट से लोग अपना मोबाइल फोन भी चार्ज कर सकेंगे। 40 वॉट का एलईडी टेलीविजन 3-4 घंटे तक चला सकेंगे। इस पर राज्य सरकार 3 करोड़ 83 लाख खर्च कर रही है। 1000 बीपीएल परिवारों का चयन उपमंडल पांगी का स्थानीय प्रशासन करेगा। इन संयंत्रों की मरम्मत व रखरखाव के लिए संबंधित कंपनियों द्वारा स्थानीय निवासियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। कंपनी ने उपभोक्ता सेवा केंद्र भी स्थापित किया है। ऑफ ग्रिड सोलर पावर प्लांट की मरम्मत व रखरखाव की जिम्मेदारी पांच वर्ष तक कंपनी की होगी।