शिमला: 70 फीसदी रोजगार, सरकारी भूमि पर कब्जे पर कोलर के उद्योग और सरकार को हाईकोर्ट का नोटिस
सिरमौर की पंचायत कोलर में स्थापित एक निजी औद्योगिक इकाई की ओर से स्थानीय लोगों को 70 फीसदी रोजगार न देने, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और प्राकृतिक जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने जिला सिरमौर की पंचायत कोलर में स्थापित एक निजी औद्योगिक इकाई की ओर से स्थानीय लोगों को 70 फीसदी रोजगार न देने, सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और प्राकृतिक जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश चिराग भानु की खंडपीठ ने ललित मोहन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार सहित अन्य प्रतिवादियों और उद्योग इकाई को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जनहित याचिका में बताया गया है कि कोलर के 18 अप्रैल 2024 के प्रस्ताव के तहत प्रतिवादी कंपनी को इस शर्त पर औद्योगिक इकाई स्थापित करने का आश्वासन दिया गया था कि वह प्रभावित क्षेत्र के स्थानीय निवासियों को कम से कम 70 फीसदी रोजगार प्रदान करेगी।
हालांकि, डिप्टी कमिश्नर सिरमौर को सौंपी गई शिकायत के अनुसार वर्तमान में इस इकाई में लगभग 1,000 कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन इनमें से एक भी कर्मचारी पंचायत कोलर का निवासी नहीं है। आरोप लगाया गया है कि औद्योगिक इकाई ने सरकारी भूमि के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इतना ही नहीं, उद्योग के निर्माण और विस्तार के कारण श्मशानघाट की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग भी बाधित हो गया है। याचिका में यह चिंता भी जताई गई है कि यह इकाई प्राकृतिक जलस्रोतों के बिल्कुल समीप है। इससे जल स्रोतों के दूषित होने और क्षेत्र में गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। खंडपीठ ने राज्य सरकार को याचिका में उठाए गए सभी बिंदुओं (रोजगार, भूमि कब्जा और जल प्रदूषण) पर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 14 अक्तूबर को होगी।