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हिमाचल हाईकोर्ट का फैसला: पदोन्नति और वरिष्ठता के लिए गिनी जाए बिजली बोर्ड जेओए आईटी की अनुबंध सेवा

Tue, 08 Sep 2026 05:28 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 08 Sep 2026 05:28 PM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य बिजली बोर्ड के जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) आईटी कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। फैसले में कहा कि कर्मचारियों की नियमितीकरण से पूर्व बिना ब्रेक अनुबंध सेवा को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति सहित सभी सेवा लाभों के लिए गिना जाए। 

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Himachal High Court Ruling: Contractual service of Electricity Board JOA (IT) personnel to count towards senio
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य बिजली बोर्ड के जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (जेओए) आईटी कर्मचारियों के हक में महत्वपूर्ण फैसला दिया है। फैसले में कहा कि कर्मचारियों की नियमितीकरण से पूर्व बिना ब्रेक अनुबंध सेवा को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पदोन्नति सहित सभी सेवा लाभों के लिए गिना जाए। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 83 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की। जेओए आईटी कर्मियों की सात वर्ष की सेवा (अनुबंध और नियमित) पूरी होने पर उन्हें वरिष्ठ सहायक के पद पर पदोन्नति के योग्य माना जाएगा। अनुबंध अवधि के दौरान यदि वार्षिक वेतन वृद्धि नहीं मिली थी, तो उसे नियमितीकरण के समय भविष्य के वेतन और पेंशन लाभों की गणना के लिए काल्पनिक आधार पर जोड़ना होगा। 

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सभी बकायों का भुगतान 31 दिसंबर तक कर करें: अदालत
 अदालत ने बोर्ड को निर्देश दिया है कि सभी बकायों का भुगतान 31 दिसंबर तक कर करें। निर्धारित समय-सीमा तक भुगतान न करने की स्थिति में बोर्ड को देय तिथि से भुगतान की तारीख तक 6 फीसदी वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
कोर्ट ने बोर्ड को निर्देश दिया कि जेओए कोटे (57 फीसदी) की रिक्तियों के तहत पात्र कर्मियों की डीपीसी करवाएं। वरिष्ठ सहायक पद के लिए क्लर्क का 43 और जेओए आईटी का 57 फीसदी कोटा अलग-अलग है। इसलिए जेओए आईटी कर्मियों की अनुबंध सेवा की गिनती से लिपिक वर्ग के हितों पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिनका चयन विज्ञापन, आरएंडपी नियमों और योग्यता मापदंडों का पालन करते हुए हुआ है, उनके नियमित होने के बाद उनकी शुरुआती अनुबंध सेवा को सभी लाभों के लिए गिना जाना सांविधानिक अधिकार है।

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बोर्ड की दलील को दिया अमान्य करार
राज्य सरकार के हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024 के आधार पर कर्मियों के दावे खारिज करने की बोर्ड की दलील को हाईकोर्ट ने अमान्य करार दिया है। अदालत ने पाया कि इस अधिनियम को पूर्व में ही असांविधानिक घोषित कर रद्द किया है और जिसकी पुष्टि सर्वोच्च न्यायालय ने भी की है।

 

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यह है मामला
मामला हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड में कार्यरत जूनियर ऑफिस असिस्टेंट और सीनियर असिस्टेंट का है। याचिकाकर्ताओं को 2017 से 2022 के बीच कर्मचारी चयन आयोग (एचपीएससी) की र्ती प्रक्रिया और आरएंडपी नियमों के तहत अनुबंध के आधार पर नियुक्त किया गया था। 3 साल की अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद वर्ष 2020 से 2024 के दौरान उनका नियमितीकरण हुआ। कर्मचारियों की मुख्य मांग थी कि उनकी अनुबंध सेवा के 3 वर्षों को वरिष्ठता और सीनियर असिस्टेंट के पद पर पदोन्नति (जिसके लिए 7 वर्ष की न्यूनतम अर्हता आवश्यक है) की पात्रता में शामिल किया जाए। राज्य सरकार की ओर से बनाए गए हिमाचल प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 के आधार पर बोर्ड ने कर्मचारियों के दावों को खारिज कर दिया था।

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