खुशखबरी! ग्रामीण क्षेत्रों में लगी कंपनियां बदलेंगी गांवों का नक्शा
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प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के लिहाज से एक अच्छी सूचना है। उनके क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योग, कल कारखाने, प्रोजेक्ट्स और निजी कंपनियों के मुनाफे का 15 फीसदी हिस्सा उन्हें गांव के विकास पर खर्च करना होगा।
ऐसा न करने वाली कंपनियों को बंद तक कराया जा सकता है। इस पर राज्य जैव विविधता बोर्ड ने एक प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें सूबे की 100 कंपनियों की एक सूची बनाई गई है।
इन कंपनियों के साथ लोकसभा चुनाव के बाद राज्य जैव विविधता बोर्ड की बैठक होगी। इसमें अंतिम रूप दिया जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता एक्ट में यह प्रावधान है कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित की जाने वाली कंपनियों को अपने मुनाफे का 15 प्रतिशत अंश उस गांव के विकास के नाम पर खर्च करना होगा।
80 पंचायतों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन
इसी एक्ट का सहारा लेते हुए प्रदेश जैव विविधता बोर्ड ने भी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित होने वाली कंपनियों की सूची बना ली है। साथ ही प्रदेश की 80 पंचायतों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन कर दिया है।
इसके माध्यम से उस गांव के जैव विविधता को संरक्षित करने की दिशा में काम किया जाएगा। कंपनियों से मिलने वाली राशि को विकास के साथ ही जैव विविधता संरक्षण को भी खर्चा जाएगा। प्रदेश में 3243 पंचायतें हैं।
इनमें सिलसिलेवार ग्राम जैव विविधता प्रबंधन समितियों के गठन का निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश की परंपरागत जैव विविधता को संरक्षित करने में मदद मिले।
हिमाचल प्रदेश पर्यावरण एवं विज्ञान तकनीकी विभाग के निदेशक एसएस नेगी ने बताया कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के स्पष्ट निर्देश हैं कि अधिक से अधिक गांवों में जैव विविधता प्रबंधन समितियों का गठन किया जाए।
साथ ही गांवों में जैव विविधता को संरक्षित करने के लिए एक्ट के अनुसार हरसंभव कदम उठाए जाएं।