1974 में पहली बार आया था हिमाचल, हर बार महसूस होता है नयापन : राष्ट्रपति
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद खुद को हिमाचल का मुरीद बताते हैं। एचपीयू के 24वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि राष्ट्रपति ने कहा कि वे वर्ष 1974 में पहली बार हिमाचल में आए थे। उसके बाद से लगातार आ रहे हैं।
यहां की विशिष्ट वेशभूषा और अनुपम प्राकृतिक छटा उन्हें हर बार नवीनता और ताजगी का अहसास कराती है। उन्होंने कहा कि हिमाचलियों ने शिक्षा, समाजसेवा से लेकर देश की रक्षा में बड़ा योगदान दिया है।
आबादी के लिहाज से सेनाओं में हिस्सेदारी के लिहाज से हिमाचल सबसे आगे हैं। चार परमवीर चक्र विजेता हिमाचल से हैं। ऐसे वीरों के प्रति वह बतौर तीनों सेनाओं के सुप्रीम कमांडर अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
उन्होंने कहा कि रावी, ब्यास, सतलुज और चंद्रभागा नदियों की जलधाराओं वाले हिमाचल का यह पहला विश्वविद्यालय है। इस संस्थान का प्रदेश और देश विकास में बड़ा योगदान है। विश्वविद्यालय को यूजीसी से ए ग्रेड मिला है। दूरवर्ती शिक्षा से शुरू हुआ संस्थान का सफर दूर तक पहुंच गया है।
जगह छोटी है, पर दिल बहुत बड़ा है
अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई सहित जस्टिस राजीव शर्मा, जस्टिस संजय करोल, जस्टिस धर्म चंद चौधरी, जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर, जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर, जस्टिस अजय मोहन गोयल, जस्टिस संदीप वर्मा, जस्टिस चंद्र भूषण, 1964 की हॉकी टीम के कप्तान चरणजीत सिंह, अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ी सुमन रावत मेहता कई हस्तियां यहीं से पढ़ी है।
शिक्षा मंत्री से मैंने कहा कि मेरे आने से लोगों को असुविधा होती है तो उन्होंने कहा कि आपके आने से शासन प्रशासन चुस्त-दुरुस्त हो जाता है, सफाई हो जाती है।दीक्षांत समारोह के लिए आप आए हैं तो हमारे युवा इससे उत्साहित होते हैं। उन्हें जीवन में आगे बढ़ने और राह चुनने की प्रेरणा मिलती है। राष्ट्रपति ने कहा कि जब विवि परिसर में आया तो मुख्यमंत्री को मैंने पहली प्रतिक्रिया दी कि जगह छोटी है, मगर आपका दिल बहुत बड़ा है। सभागार तक जाते उन्होंने मुझसे कहा, सर सीढ़ियां बहुत हैं तो मैने कहा, जीवन का सार भी यही है।
ऊंची छलांग लगा रही हैं बेटियां
राष्ट्रपति ने कहा कि किसी देश की युवा शक्ति उसका आधार होती है। भारत के पास यह शक्ति है, जो बदलाव लाने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण की बात चलती है, मगर जिस तरह विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडल पाने वाली दस की दस छात्राएं हैं।इससे ऐसा लगता है कि आने वाले समय में कहीं पुरुषों को आरक्षण की जरूरत न पड़ जाए। बेटियां आज ऊंची छलांग लगा रही हैं। यह गौरव की बात है कि दीक्षांत समारोह में सम्मनित होने वाले 230 विद्यार्थियों में 180 बेटियां हैं। 170 पीएचडी धारकों में भी बेटियां अधिक हैं।
जहां जाता हूं, ख्याल रखता हूं आम जनता को कम असुविधा हो
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि मैं जहां जाता हूं, वहां आम जनता को होने वाली असुविधा का ख्याल रखता हूं। मेरा प्रयास रहता है कि दिल्ली में भी पीक ऑवर में सफर न करूं , वापस आने पर भी किसी को असुविधा न हो, इसका ख्याल रखता हूं। चाहता हूं कि सब आगे बढ़ें, ऐसे बढ़ें कि दुनिया देखती रह जाए। विदेशों के विश्वविद्यालयों में संबोधन के लिए जाता हूूं तो हमारे देश के युवाओं को भी दीक्षांत समारोह में जाकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करूं।
समारोह में ये अतिथि भी रहे मौजूद
राष्ट्रपति की धर्मपत्नी सविता कोविंद, शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री किशन कपूर, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल, विधायकगण, मुख्य सचेतक नरेन्द्र बरागटा, सांसद वीरेन्द्र कश्यप, विधायक कर्नल डॉ. धनी राम शांडिल, बलवीर वर्मा, राकेश सिंघा, किशोरी लाल, विक्त्रस्मादित्य सिंह, नगर निगम शिमला की महापौर कुसुम सदरेट, हिमाचल जल प्रबन्धन बोर्ड के उपाध्यक्ष दर्शन सैनी, महासचिव बाल कल्याण परिषद पायल वैद्य, उपाध्यक्ष सक्षम गुडिया बोर्ड रूपा शर्मा, मुख्य सचिव बी.के. अग्रवाल, पुलिस महानिदेशक एस.आर. मरडी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो. राजेन्द्र सिंह चौहान, प्रोफेसर, डीन, विभागाध्यक्षों सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।