फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   president of himachal govt teachers union virender chauhan statement

'नेता और अफसर भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं'

Sat, 02 Apr 2016 08:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 02 Apr 2016 08:37 AM IST
विज्ञापन
president of himachal govt teachers union virender chauhan statement
विधानसभा में विधायकों की टिप्पणी पर अध्यापक संघ ने कड़ी नाराजगी जताई है - फोटो : फाइल फोटो

विधानसभा में शिक्षा विभाग पर लाए गए कटौती प्रस्ताव के दौरान कुछ विधायकों की टिप्पणियों पर राजकीय अध्यापक संघ ने कड़ी नाराजगी जताई है। संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा है शिक्षा के राजनीतिकरण के चलते ही सरकारी स्कूलों की हालत बिगड़ी है। विधायकों की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि नेता और अफसर भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं। उन्होंने पूछा कि जब सरकारी स्कूलों में सुविधाएं नहीं हैं तो क्यों न लोग प्राइवेट स्कूलों की ओर जाएं।

विज्ञापन


राजकीय अध्यापक संघ के संरक्षक अजीत चौहान, केपी शर्मा, महासचिव संजय कपूर, वित्त सचिव अरुण गुलेरिया, प्रधान प्रेस सचिव कैलाश ठाकुर, उपाध्यक्ष सूरज महाजन, विजय गोस्वामी, मुख्यालय सचिव चितरंजन काल्टा, संगठन सचिव नागेश्वर पठानिया, मनीष सूद, महावीर कैंथला, नरेश महाजन, रमेश शर्मा, सरोज मेहता, कपिला, संजीव ठाकुर, नरोत्तम धीमान, राजीव ठाकुर, सुनील वर्मा और नरोत्तम वर्मा सहित कई अन्य ने यहां जारी प्रेस बयान में कहा कि एक माननीय ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि शिक्षक शिमला में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पोस्टिंग करवाते हैं।
विज्ञापन


संघ ने पूछा कि क्या सभी सुविधा युक्त स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने का अधिकार राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों का ही है। संघ के पदाधिकारियों ने कहा हम पहले ही इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले का स्वागत कर चुके हैं, जिसमें सरकारी कोष से वेतन प्राप्त करने वाले सभी व्यक्तियों को अपने बच्चों को अनिवार्य रूप से सरकारी स्कूलों में भेजने का फैसला सुनाया है। शिक्षकों ने कहा माननीयों को इस मामले पर भी चर्चा करनी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


इसके अलावा सरकारी तथा निजी स्कूलों में ढांचागत उपलब्धता में अंतर, अध्यापकों की संख्या, गैर शैक्षणिक कार्यों में शिक्षकों की संलिप्तता, शिक्षकों की चयन प्रक्रिया पर भी चर्चा करनी चाहिए। कहा, एसएमसी के विरोध की जगह रोस्टर की मांग की जा रही है। शिक्षकों पर तरह-तरह के तथ्यहीन आरोप लगाए जा रहे हैं। राजकीय अध्यापक संघ ने सरकारी स्कूलों के गिरते स्तर के लिए शिक्षकों को जिम्मेवार ठहराने वालों को खुली बहस की चुनौती दी है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed