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Potato Crop: आलू की फसल में झुलसा रोग से सावधान रहें, समय रहते करें निगरानी और स्प्रे, एडवाइजरी जारी

Wed, 10 Jul 2024 09:30 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: अंकेश डोगरा Updated Wed, 10 Jul 2024 09:30 PM IST
सार

केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) ने आलू किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है। संस्थान के निदेशक ब्रजेश सिंह ने बताया कि मौसम की अनुकूलता के आधार पर पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्थान की ओर से विकसित इन्डो- ब्लाइटकास्ट (पैन इंडिया) मॉडल से पिछेता झुलसा बीमारी का पूर्वानुमान लगाया गया है।

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Potato Crop Beware of blight disease in potato crop monitor and spray in time advisory issued
आलू. - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मौसम में बदलाव से इस समय आलू की फसल में पिछेता झुलसा रोग लगने की आशंका है। समय रहते इनका प्रबंधन जरूरी है। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) ने आलू किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है।

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संस्थान के निदेशक ब्रजेश सिंह ने बताया कि मौसम की अनुकूलता के आधार पर पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्थान की ओर से विकसित इन्डो- ब्लाइटकास्ट (पैन इंडिया) मॉडल से पिछेता झुलसा बीमारी का पूर्वानुमान लगाया गया है। इसके अनुसार आलू की फसल में पिछेता झुलसा बीमारी आने की आशंका है। समय रहते फसल को बीमारी के प्रकोप से बचने के लिए प्रबंधन जरूरी है। जिन किसानों ने आलू की फसल में अभी तक फफूंदनाशक दवा का छिड़काव नहीं किया है या जिनकी आलू की फसल में अभी पिछेता झुलसा रोग के लक्षण नहीं दिखाई दे रहे हैं, वे मैन्कोजेब क्लोरोथलोनील युक्त फफूंद नाशक दवा का रोग सुग्राही किस्मों पर 0.2 प्रतिशत की दर से 2.0 किलोग्राम दवा 1000 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर तुरन्त छिड़काव करें। जिन खेतों में बीमारी के लक्षण दिखने शुरू हो गए हैं, वहां किसी भी फफूंद नाशक जैसे साईमोक्सेनिल + मैन्कोजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से अथवा फेनोमिडोन मैन्कोजेब का 3.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से या डाइमेथोमोर्फ 1.0 किलोग्राम + मैन्कोजेब 2.0 किलोग्राम (कुल मिश्रण 3.0 किलोग्राम) प्रति हेक्टेयर (1000 लीटर पानी) की दर से छिड़काव करें।
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फफूंदनाशक का छिड़काव दस दिन के अंतराल पर दोहराया जा सकता है, लेकिन बीमारी की तीव्रता के आधार पर इस अंतराल को घटाने या बढ़ने पर किसान फैसला ले सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखना जरूरी है कि एक ही फफूंद नाशक का बार-बार छिड़काव न करें तथा फफूंदनाशक के साथ स्टिकर (0.1%) का इस्तेमाल अवश्य करें।खेतों में जल निकास का उचित प्रबंध रखें और खरपतवार को भी न पनपने दें।

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