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बौनेपन को दूर करने के लिए प्रदेश में चलेगा पोषण अभियान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 15 Oct 2018 10:20 AM IST
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कुपोषण रोकने को हिमाचल में पोषण अभियान चलाया जा रहा है। पहले चरण में यह अभियान चंबा, हमीरपुर, सोलन और शिमला जिलों में चलाया जाएगा। दूसरे चरण में ऊना जिले को अभियान से जोड़ा जाएगा। बच्चों में बौनेपन की समस्या दूर करने को सरकार ने यह पहल की है। बाल विकास परियोजना, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज और शिक्षा विभाग मिल-जुलकर काम करेंगे, ताकि नाटेपन की दर को घटाकर वर्ष 2022 तक 15 प्रतिशत तक लाया जा सके।
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मौजूदा समय में यह दर करीब 26 प्रतिशत है। पोषण अभियान में 6 वर्ष से कम उम्र के बच्चे शामिल किए गए हैं। इसके तहत देश के सभी राज्यों में कुपोषण मिटाने को यह मुहिम चलाई गई है। वर्ष 2017-2018 में देश के 315 जिलों को अभियान के तहत लाया गया।
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साल 2018-2019 में अन्य 235 जिलों में यह अभियान शुरू किया गया है। बाकी बचे जिलों को साल 2019-2020 में अभियान से जोड़ा जाएगा। अभियान के अंतर्गत चिकित्सा अधिकारी विद्यालयों, महाविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में कुपोषण, रक्ताल्पता और अन्य पोषण जन्य विकारों के निदान, रोकथाम और उपचार के बारे में जागरूक करते हैं।
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ऐसे पूरा होगा लक्ष्य
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. राजीव सैजल ने बताया कि पोषण अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता नौनिहालों पर स्मार्ट फोन के जरिये निगरानी रखते हैं। इनके खान-पान की निगरानी को 5 जिलों के करीब 8000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन दिए जा रहे हैं। शेष सात जिलों के 10 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अगले साल अप्रैल महीने में स्मार्ट फोन दिए जाएंगे।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता स्मार्ट फोन के जरिये बच्चों का सटीक डाटा एकत्र करते हैं। नवजात के लिए मां का दूध एक घंटे के भीतर मिलना आवश्यक है और बच्चे को कम से कम छह महीने तक मां का दूध दिया जाना चाहिए। इसे दो वर्ष तक जारी रखना चाहिए। बच्चों में दस्त, न्यूमोनिया और कमजोरी के बहुत मामले सामने आते हैं।