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सेब ने गड़बड़ाए पंजे और कमल के समीकरण
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शिमला। जेएनके (जुब्बल नावर कोटखाई) विधानसभा उपचुनाव में सेब ने पंजे और कमल के समीकरण गड़बड़ा दिए हैं। कांग्रेस के हाथ और भाजपा के कमल के लिए निर्दलीय प्रत्याशी चेतन बरागटा का चुनाव चिह्न सेब कड़ी चुनौती दे रहा है। निर्दलीय प्रत्याशी चेतन बरागटा के चुनाव में उतरने से यहां मुकाबला रोचक हो गया है। हमेशा की तरह इस बार भी उपचुनाव में दिवंगत रामलाल ठाकुर और नरेंद्र बरागटा के परिवारों की साख दांव पर लगी हुई है। भाजपा नीलम सरैईक के रूप में नया चेहरा स्थापित करने का प्रयोग कर रही है। जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर राजपूतोें का वर्चस्व रहा है। इस बार जुब्बल-कोटखाई में एक अन्य निर्दलीय प्रत्याशी सुमन कदम भी बल्ला चुनाव चिह्न लेकर मैदान में है।
जुब्बल-कोटखाई विधानसभा हॉट सीट बन चुकी है। नरेंद्र बरागटा के देहांत के बाद चेतन बरागटा को भाजपा का टिकट मिलना तय माना जा रहा था लेकिन टिकट नीलम सरैईक ने झटक लिया। परिवारवाद के पैमाने से भाजपा टिकट की दौड़ से बाहर हुए चेतन निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। इनका सहयोग करने वालों को भाजपा धड़ाधड़ निष्कासित कर रही है। कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पोते हैं। रोहित दो बार विधायक और मुख्य संसदीय सचिव रह चुके हैं। पिछले चुनाव में रोहित ठाकुर को भाजपा के नरेंद्र बरागटा ने महज 1062 वोटों से शिकस्त दी थी। भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैईक एक बार चेतन बरागटा के जिला परिषद वार्ड थरोला और एक बार रोहित ठाकुर के जिला परिषद वार्ड जयपीड़ी से जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।
चेतन कोटखाई की थरोला पंचायत के रहने वाले हैं। नीलम बघार पंचायत की हैं जबकि रोहित ठाकुर जुब्बल की धार पंचायत से आते हैं। जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से पहली बार किसी पार्टी ने महिला को प्रत्याशी बनाया है। एक धारणा है कि तीन बार प्रदेश को मुख्यमंत्री देने वाला जुब्बल-कोटखाई हलका कभी सत्ता से बाहर नहीं हुआ। यहां के वोटरों ने कभी भी विपक्ष में बैठने के लिए जनादेश नहीं दिया।
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ये हैं समीकरण
कोटखाई भाजपा का गढ़ रहा है। जुब्बल से कांग्रेस लीड लेकर आती रही है। नावर क्षेत्र के करीब 9000 वोट जिसके पक्ष में पड़ते हैं, उसकी जीत के आसार बढ़ जाते हैं। इस बार भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी दोनों कोटखाई से हैं। पिछले चुनाव में नावर से कांग्रेस को लीड मिली थी, हालांकि नावर के एक क्षेत्र पर आरएसएस के लोगों की भी पकड़ मानी जाती है। कोटखाई में कांग्रेस का भी परंपरागत वोट बैंक है। सहानुभूति की लहर भी यहां सभी दलों का नुकसान-नफा तय करेगी।
9 बार कांग्रेस, दो बार भाजपा, एक बार जनता दल की जीत
पिछले 12 चुनावों में जुब्बल कोटखाई सीट पर 9 बार कांग्रेस, दो बार भाजपा और एक बार जनता दल ने जीत हासिल की है। 1967 में कांग्रेस, 1972 में कांग्रेस, 1977 में कांग्रेस, 1982 में कांग्रेस, 1985 में कांग्रेस, 1990 में जनता दल, 1993 में कांग्रेस, 1998 में कांग्रेस, 2003 में कांग्रेस, 2007 में भाजपा, 2012 में कांग्रेस और 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की।
पुरुषों से अधिक महिला मतदाता
महिला मतदाता 35626
पुरुष मतदाता 35166
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जुब्बल-कोटखाई विधानसभा हॉट सीट बन चुकी है। नरेंद्र बरागटा के देहांत के बाद चेतन बरागटा को भाजपा का टिकट मिलना तय माना जा रहा था लेकिन टिकट नीलम सरैईक ने झटक लिया। परिवारवाद के पैमाने से भाजपा टिकट की दौड़ से बाहर हुए चेतन निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं। इनका सहयोग करने वालों को भाजपा धड़ाधड़ निष्कासित कर रही है। कांग्रेस प्रत्याशी रोहित ठाकुर पूर्व मुख्यमंत्री रामलाल ठाकुर के पोते हैं। रोहित दो बार विधायक और मुख्य संसदीय सचिव रह चुके हैं। पिछले चुनाव में रोहित ठाकुर को भाजपा के नरेंद्र बरागटा ने महज 1062 वोटों से शिकस्त दी थी। भाजपा प्रत्याशी नीलम सरैईक एक बार चेतन बरागटा के जिला परिषद वार्ड थरोला और एक बार रोहित ठाकुर के जिला परिषद वार्ड जयपीड़ी से जिला परिषद सदस्य रह चुकी हैं।
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चेतन कोटखाई की थरोला पंचायत के रहने वाले हैं। नीलम बघार पंचायत की हैं जबकि रोहित ठाकुर जुब्बल की धार पंचायत से आते हैं। जुब्बल-कोटखाई विधानसभा क्षेत्र से पहली बार किसी पार्टी ने महिला को प्रत्याशी बनाया है। एक धारणा है कि तीन बार प्रदेश को मुख्यमंत्री देने वाला जुब्बल-कोटखाई हलका कभी सत्ता से बाहर नहीं हुआ। यहां के वोटरों ने कभी भी विपक्ष में बैठने के लिए जनादेश नहीं दिया।
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ये हैं समीकरण
कोटखाई भाजपा का गढ़ रहा है। जुब्बल से कांग्रेस लीड लेकर आती रही है। नावर क्षेत्र के करीब 9000 वोट जिसके पक्ष में पड़ते हैं, उसकी जीत के आसार बढ़ जाते हैं। इस बार भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशी दोनों कोटखाई से हैं। पिछले चुनाव में नावर से कांग्रेस को लीड मिली थी, हालांकि नावर के एक क्षेत्र पर आरएसएस के लोगों की भी पकड़ मानी जाती है। कोटखाई में कांग्रेस का भी परंपरागत वोट बैंक है। सहानुभूति की लहर भी यहां सभी दलों का नुकसान-नफा तय करेगी।
9 बार कांग्रेस, दो बार भाजपा, एक बार जनता दल की जीत
पिछले 12 चुनावों में जुब्बल कोटखाई सीट पर 9 बार कांग्रेस, दो बार भाजपा और एक बार जनता दल ने जीत हासिल की है। 1967 में कांग्रेस, 1972 में कांग्रेस, 1977 में कांग्रेस, 1982 में कांग्रेस, 1985 में कांग्रेस, 1990 में जनता दल, 1993 में कांग्रेस, 1998 में कांग्रेस, 2003 में कांग्रेस, 2007 में भाजपा, 2012 में कांग्रेस और 2017 में भाजपा ने जीत दर्ज की।
पुरुषों से अधिक महिला मतदाता
महिला मतदाता 35626
पुरुष मतदाता 35166