हिमाचल विस सत्र: करुणामूलक आधार पर नौकरियों के लिए बनेगी नीति
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आवेदनकर्ता को बार-बार नौकरी के लिए चक्कर न काटने पड़े, इसके लिए भी नीति में प्रावधान किए जाएंगे। ज्वालाजी के विधायक रमेश ध्वाला के प्रश्न के जवाब में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि करुणामूलक आधार पर नौकरी मौलिक अधिकार नहीं है।
लेकिन, मानवीय संवेदनाओं को ध्यान में रखकर आर्थिक रूप से कमजोर मृतक कर्मचारियों के आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर नौकरी दी जा रही है। करुणामूलक आधार पर नौकरी को आवेदन करते समय दस्तावेज उपलब्ध नहीं करवाए जाते हैं।
इससे औपचारिकताएं पूरा होने में समय लग जाता है। पिछले पांच सालों में विभिन्न विभागों के तहत 5153 आवेदन किए गए। इसमें 2095 आवेदकों को नौकरी दी गई जबकि 2051 मामले वित्त विभाग के पास लंबित हैं।
विधायक अरुण कुमार कूका, नंद लाल और नरेंद्र ठाकुर ने भी अनुपूरक प्रश्न किए। जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि करुणामूलक आधार पर नौकरी के लिए बनने वाली नीति में सभी के सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी। नीति के लिए कोई भी सुझाव दे सकता है। उनका पालन किया जाएगा।
सातवें वेतन आयोग के लिए करना पड़ेगा इंतजार
हिमाचल प्रदेश में कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के लिए अभी लंबा इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि पंजाब में अभी सातवां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ है।
कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्घ सिंह के प्रश्न के लिखित जबाव में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि प्रदेश में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन में सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुसार संशोधन अपेक्षित है।
राज्य सरकार अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन संशोधन के अधिकतर मामलों में पंजाब वेतन आयोग की सिफारिशों पर विचार करती है। पंजाब में छठे वेतन आयोग का गठन किया गया है, जिसकी सिफारिशें अभी वांछित हैं।