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Shimla News: पुलिस बनी अभिभावक, युवाओं से नशा छोड़ने में कर रही मदद

Tue, 25 Aug 2026 11:59 PM IST
Shimla Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Tue, 25 Aug 2026 11:59 PM IST
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Police step into the role of guardians, helping youth give up drugs.
रुस्तम अभियान में पुलिस पीड़ितों को मुख्यधारा में लाने का कर रही काम, 155 युवाओं की चल रही काउंसलिंग
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क्रॉसर

अस्पताल में युवाओं संग रहकर कराया जा रहा उपचार
निगरानी कर तस्करों से दूर रखने में की जा रही मदद

अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। जिला पुलिस नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के साथ ही नशे के आदी युवाओं को इस दलदल से निकलने में अभिभावक बनकर मदद कर रही है।

पुलिस ने रुस्तम अभियान के तहत ऐसे युवाओं की पहचान और निगरानी शुरू की है, जो किसी कारणवश नशे के आदी हो गए हैं और अब इससे बाहर निकलकर सामान्य जिंदगी जीना चाहते हैं। विशेष अभियान के तहत पुलिस ने 155 ऐसे युवाओं की पहचान की है, जो सिंथेटिक ड्रग यानी चिट्टे की लत में फंसे हुए हैं। इन युवाओं की नियमित काउंसलिंग के साथ ही अभिभावकों के साथ मिलकर नशा छुड़ाने में पुलिस हरसंभव मदद कर रही है। इन युवाओं को नशा तस्करों से भी दूर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिमला पुलिस की कोशिश है कि युवाओं को नशे की लत से बाहर निकाला जाए। जिला पुलिस नशे के आदी युवाओं की नियमित निगरानी के साथ ही उनके उपचार के लिए अस्पतालों में रहकर भी अहम भूमिका निभा रही है। इसमें कई ऐसे युवा हैं, जो अभिभावकों की बात सुनने को तैयार नहीं होते हैं। ऐसे में उनके नियमित उपचार के लिए बाकायदा एसएसपी शिमला की ओर से विशेष सेल और अन्य पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है।

पुलिस नशा तस्करी के मामलों में ऐसे युवाओं की पहचान कर रही है, जो नशे के आदी हैं। इन युवाओं को पुलिस बुलाकर उनके अभिभावकों को सूचित करती है और इसके बाद काउंसलिंग कर उन्हें नशा छोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता है। कई मामलों में पुलिस के जरिये ही अभिभावकों को पता चलता है कि उनका बच्चा नशे की चपेट में आ गया है। ऐसे में पुलिस अभिभावकों को ढांढस बंधाने के साथ ही युवाओं को भी विश्वास दिलाती है कि वह नशा छोड़कर दोबारा अपनी जिंदगी की नई शुरुआत कर सकते हैं। उन्हें समझाया जाता है कि वह आरोपी नहीं, बल्कि पीड़ित हैं। ऐसे में प्रशासन और सरकार उनकी मदद के लिए आगे आ रही है।
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कोट
पुलिस रुस्तम योजना के तहत नशे के आदी युवाओं की पहचान कर उन्हें नशा छोड़ने में मदद कर रही है। अभी तक 155 ऐसे युवाओं की पहचान कर उनकी काउंसलिंग और उनके अभिभावकों के साथ मिलकर उपचार भी करवाया जा रहा है। नशा तस्करों पर कड़ी कार्रवाई के साथ ही हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी युवा पीढ़ी को गलत रास्ते पर जाने से रोकें। शिमला पुलिस ऐसे सभी युवाओं को नई जिंदगी की शुरुआत करने में मदद करना चाहती है।
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-गौरव सिंह, एसएसपी शिमला
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