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गुड़िया केसः प्रेस कांफ्रेंस को सही साबित करने के चक्कर में हो गई सूरज की हत्या

Tue, 28 Nov 2017 01:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 28 Nov 2017 01:50 PM IST
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police sit killed suraj in gudiya rape and murder case

सीबीआई की मानें तो गुड़िया प्रकरण को सुलझाने का दावा करने के लिए आनन फानन में बुलाई गई डीजीपी दफ्तर की प्रेस कांफ्रेंस ने ही सूरज सिंह की जान ले ली। 

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इस प्रेस कांफ्रेंस में एसआईटी प्रमुख जहूर जैदी ने दुराचार के बाद गुड़िया की हत्या करने वालों को पकड़ लेने का खुलासा किया था। सीबीआई के अनुसार जिन 6 लोगों को जैदी ने गुनहगार बताया उन्होंने असल में तब तक अपना गुनाह कबूल ही नहीं किया था। 
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जिन वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी करने की दलील जैदी ने पत्रकार वार्ता में दी थी, सीबीआई के मुताबिक केस फाइल में ऐसा कुछ नहीं था। उलटा, एसआईटी के दावों को सही साबित करने के लिए पुलिस वालों ने आरोपियों पर थर्ड डिग्री टार्चर का इस्तेमाल किया। 
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सीबीआई की माने तो थर्ड डिग्री से न केवल सूरज की मौत हो गई बल्कि अन्य आरोपियों से जबरन गुनाह कबूल करवा झूठा फंसाया गया। सूरज हत्याकांड का सीबीआई जांच में जिस तरह से खुलासा हुआ है, वह दिल दहला देने वाला है।

पीट-पीटकर मारा गया

police sit killed suraj in gudiya rape and murder case

सीबीआई सूत्रों के मुताबिक चार्जशीट में इस बात का जिक्र है कि छह पुलिस कर्मियों ने ठियोग के डीएसपी मनोज जोशी की मौजूदगी में नेपाली सूरज सिंह की पीट-पीटकर हत्या कर दी। जबरन गुनाह कबूल करवाने के लिए सूरज सिंह को दो दिन पहले से लेकर मौत के दो घंटे पहले तक पीट-पीटकर मारा गया।

उसे रॉड, लाठी या छड़ी जैसी किसी ठोस चीज से मारा जाता रहा, जिसकी पुष्टि खुद एम्स के डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट में की है। डीएसपी जोशी और अन्य पुलिस वालों ने यह अपराध 13 जुलाई की पत्रकार वार्ता में इस मामले को सुलझा लेने के दावे को पुष्ट करने के लिए किया गया।

इस प्रेस वार्ता के तुरंत बाद जैदी शिमला छोड़ कर छुट्टी पर चले गए। 17 जुलाई को डीएसपी मनोज जोशी ने फोन पर एसआईटी प्रमुख जैदी को बताया कि लोकजन उर्फ छोटू से यह गुनाह कबूल करवा लिया गया है। इसकी वीडियो रिकार्डिंग भी कर ली गई है।

हालांकि हैरत की बात है कि ये वीडियो रिकार्डिंग केस रिकार्ड में शामिल नहीं गई। जांच के दौरान सीबीआई को कबूलनामे की ये वीडियो रिकार्डिंग जैदी के आफिस डेस्क टॉप कंप्यूटर से मिली। सीबीआई को इस वीडियो में छोटू को क्राइम सीन पर भी ले जाने के दृश्य भी मिले हैं। जिसमें मार के कारण वह ठीक से चल भी नहीं पा रहा।

अपराध कबूल करवाने को ऐसे बनाई रणनीति

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सीबीआई सूत्रों की मानें तो 18 जुलाई, 2017 को जैदी ने छुट्टियों से लौटने के बाद दफ्तर ज्वाइन किया और एसआईटी अधिकारियों के साथ उन्होंने पीएचक्यू में  बैठक की। सीबीआई जांच के मुताबिक जैदी ने डीएसपी मनोज जोशी को कहा कि अन्य चार आरोपियों से किसी भी सूरत में अपराध कबूल करवाओ।

18 जुलाई की रात को जोशी कोटखाई पुलिस स्टेशन गए और यहां पर तीन गिरफ्तार आरोपियों से अपराध कबूल करवाने के लिए एसएचओ राजेंद्र सिंह, एएसआई दीप चंद, एचएचसी मोहन लाल, एचएचसी सूरत सिंह, हेड कांस्टेबल रफी मोहम्मद और कांस्टेबल रंजित स्ट्रेटा की मदद ली।

आरोपी सुभाष और सूरज सिंह को पुलिस स्टेशन जुब्बल से पुलिस थाना कोटखाई लाया गया। इसके बाद राजेंद्र सिंह, दीप चंद, रफी मोहम्मद, मोहन लाल, सूरत सिंह और रंजित स्ट्रेटा ने नेपाली सूरज सिंह को बुरी तरह से मारा-पीटा और प्रताड़ित किया।

इस प्रताड़ना को डीएसपी मनोज जोशी की निगरानी में अंजाम दिया गया। इन्होंने सूरज सिंह को गुड़िया से दुराचार और उसकी हत्या का अपराध कबूल कराने के लिए बेरहमी से जख्मी किया। इस मारपीट के बाद सूरज सिंह की मौत हो गई।

आईजीएमसी के पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी फरेब 

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सीबीआई को सूरज सिंह की पत्नी ममता देवी ने बताया कि पुलिस हिरासत में उसे बुरी तरह से पीटा गया। पुलिस की ओर से आईजीएमसी में करवाए गए पोस्टमार्टम के अनुसार उस पर कई घाव पाए गए। इस रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण ट्रोमैटिक शॉक है।

वहीं, सीबीआई को एम्स नई दिल्ली की ओर से दी गई दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार उसकी मौत का कारण हिरासत में की गई प्रताड़ना के रूप में साफ होता है। इस रिपोर्ट के अनुसार मौत से पहले उसे बुरी तरह से मारा-पीटा गया, उसे किसी मजबूत बेलन के आकार के किसी हथियार से मारा गया।

यह लाठी, रॉड या छड़ी हो सकती है। ऐसे किसी हथियार से दो दिन से लेकर मौत के दो घंटे पहले तक उसे मारा जाता रहा। उसे पीठ, हिप और निचले अंगों आदि में गंभीर चोर्टें आइं। घाव भी शरीर के भीतर तक फैल गए। इसी प्रताड़ना से उसकी मौत हुई। एम्स के चिकित्सकों ने उसकी किसी के गुत्थमगुत्था होने से हत्या होने की आशंका से इंकार किया है। 

कोटखाई में दिए गिरफ्तारी के आदेश, शिमला में की कांफ्रेंस

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12 जुलाई को राजेंद्र उर्फ राजू को दोपहर बाद ढाई बजे पुलिस ने उठाया और वन विश्राम गृह महासू में एसएचओ राजेंद्र सिंह और अन्य ने पूछताछ की, उसके बाद उसे पुलिस हिरासत में रखा गया।

12 जुलाई की रात को पुलिस ने दांदी मंदिर से सुभाष और दीपू को उसके घर से उठाया फिर उनसे महासू वन विश्राम गृह में देर रात तक पूछताछ की गई। हुल्ली में बगीचे में काम कर रहे सूरज सिंह और लोकजन उर्फ छोटू को उठाया और उन्हें महासू ले गए।

उसके बाद पांचों को पुलिस थाना कोटखाई में रखा गया। 13 जुलाई को वहां उनसे आईजी ने भी पूछताछ की। इसके बाद आईजी ने पांचों को गिरफ्तार करने के आदेश दिए। आईजी जैदी इसके बाद तुरंत शिमला आए। राज्य पुलिस मुख्यालय में बड़ी धूमधाम से साढ़े चार बजे पत्रकार वार्ता की गई।

पत्रकार वार्ता में जैदी ने दावा किया कि गुड़िया दुराचार और हत्या मामले को सुलझा दिया गया है और इसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 14 जुलाई को उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जहां से उन्हें सात दिन पुलिस के रिमांड पर भेजा गया।

पुलिस की केस डायरी में छिपाई पूछताछ

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11 जुलाई को एसआईटी ने गुड़िया मामले में ईशान चौहान, प्रशांत नेगी उर्फ हैप्पी नेगी और आशीष चौहान से पूछताछ की। इनसे वन विश्राम गृह महासू में कड़ी पूछताछ की गई। 11 जुलाई को ही एसआईटी प्रमुख जहूर हैदर जैदी महासू पहुंचे

और उन्होंने एसआईटी सदस्य अतिरिक्त पुलिस निदेशक भजन देव नेगी, डीएसपी रतन नेगी, डीएसपी मनोज जोशी, एसएचओ राजेंद्र सिंह और अन्य से बात की। इसके बाद आईजी के निर्देश पर तीनों को छैला चौकी और पुलिस स्टेशन कोटखाई ले जाया गया वहां उनसे कड़ी पूछताछ की गई। पुलिस की केस डायरी में इन सभी की महासू से छैला और कोटखाई आने-जाने का कोई ब्योरा नहीं लिखा गया।

निलंबित 8 पुलिस वालों पर लगी ये धाराएं

police sit killed suraj in gudiya rape and murder case

120 बी : आपराधिक षड्यंत्र रचना। 
302 : हत्या
330 : कुछ कबूल करवाने को प्रताड़ित करना। 
331 : कुछ कबूल करवाने को गंभीरता से प्रताड़ित करना। 
348 : गलत तरीके से किसी बात को कबूल करने को मजबूर करना। 
323 : मनमर्जी से किसी को प्रताड़ित करना। 
326 : किसी खतरनाक हथियार या माध्यम से मारना। 
218 : पब्लिक सर्वेंट ने गलत रिकार्ड तैयार किया और किसी व्यक्ति को सजा होने से बचाया। 
195 : किसी को सजा से बचाने के इरादे से झूठे सबूतों को तैयार करना। 
196 : उस सबूत को काम में लाना, जिसका मिथ्या होना ज्ञात है। 
201 : अपराध के साक्ष्य का विलोपन या अपराधी पर परदा डालने के लिए झूठी सूचना देना। 
34 : सामूहिक रूप से अपराध को अंजाम देना।


 

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