प्रदेश में पीएमजीएसवाई सड़कें गुणवत्ता की कसौटी पर खरी नहीं
प्रदेश में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत बनने वाली सड़कें गुणवत्ता की कसौटी में खरी नहीं उतर रही हैं। राज्य में ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं।
केंद्र सरकार ने पीएमजीएसवाई सड़कों के निर्माण को लेकर एमओयू में जो नियम और शर्तें रखीं हैं, उनका ठेकेदार उल्लंघन कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में निर्देश दिए हैं कि सड़कों के निर्माण में स्थानीय सामग्री और व्यर्थ प्लास्टिक का इस्तेमाल किया जाए।
ग्रामीण सड़कों की गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार बार-बार दिशा निर्देश देती रही है। इसमें सड़कों का निर्माण एमओयू के अनुसार करने पर जोर दिया जाता रहा है। निर्माण में स्थानीय सामग्री और व्यर्थ प्लास्टिक के इस्तेमाल को कहा गया है।
इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास विभाग ने बाकायदा कई बार लिखित फरमान भी जारी किए थे। इन निर्देशों के बावजूद निर्माण मानकों से समझौता हो रहा है। सड़कों को पक्का करते समय 20 एमएम की बजरी बिछाना जरूरी होती है लेकिन ठेकेदार ने शर्तों का उल्लंघन कर 15 एमएम से कम मोटी मेटलिंग की है।
क्या कहते हैं योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष
इसके अलावा पीएमजीएसवाई सड़कों के किनारे जल निकासी व्यवस्था समय पर नहीं की जाती। जिससे सड़कें जल्दी टूटती हैं। राज्य के योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष रमेश धवाला ने कहा कि प्रदेश में पीएमजीएसवाई सड़क ों का निर्माण एमओयू की शर्तों के अनुसार नहीं हुआ है।
सड़कों में 20 एमएम मोटी बजरी की परत बिछाई जानी थी लेकिन यह 15 एमएम से भी कम है। इसके अलावा सड़कों में स्थानीय सामग्री और व्यर्थ प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। सड़कों के साथ निकासी नालियों का निर्माण नहीं किया जा रहा। इस गंभीर मामले को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से उठाया गया है।