धर्मशाला: रैली एक साल के जश्न की, लक्ष्य में ‘मिशन 2019’
‘जन आभार रैली’ जयराम सरकार के एक साल के जश्न की है, जबकि लक्ष्य में ‘मिशन 2019’ है। इस रैली में पहुंच रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिमाचल में लोकसभा चुनाव प्रचार को रफ्तार देने को हुंकार भरेंगे। पीएम मोदी सीएम जयराम ठाकुर के एक साल के कार्यकाल को सफल करार देते हुए उन्हें हजारों लोगों के बीच शाबाशी देते नजर आएंगे तो चुनावी आहट के साथ हिमाचल के लिए कुछ नए एलान भी कर सकते हैं।
सीएम जयराम के सामने 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी की झोली में चारों सीटें दोबारा डालने की बड़ी चुनौती है, जो उनकी परीक्षा भी है। इसी विशेष लक्ष्य से धर्मशाला की यह ‘जन आभार रैली’ हो रही है। एक साल पहले हिमाचल की तेरहवीं विधानसभा के चुनाव में भाजपा की जीत हुई तो यहां की सारी सियासत ही पलट गई। न केवल कांग्रेस का तख्ता पलट हुआ, बल्कि भाजपा की राजनीति ही बदल गई।
प्रदेश में भगवा परचम लहराने के बावजूद भाजपा के मुख्यमंत्री पद के लिए घोषित उम्मीदवार प्रेम कुमार धूमल खुद चुनाव हार गए तो जयराम ठाकुर ही प्रधानंमत्री नरेंद्र मोदी की पसंद बने। जयराम ठाकुर का ग्रामीण पृष्ठभूमि से होना, सरल-सादा व्यवहार होना आदि ऐसी कई खूबियों के चलते हिमाचल के काफी लोगों को भी मोदी का यह फैसला पसंद आया।
मगर चुनौतियां उनके सामने भी हैं। इनसे निपटने को पिछले मुख्यमंत्रियों की तरह एक साल के अल्पकाल में वह भी कोई जादू की छड़ी नहीं ला पाए हैं। हालांकि, इस एक साल में दिन-रात फील्ड में रहे हैं। इस सबके बीच हिमाचल को मुख्यधारा में लाने और अपना दमखम दिखाने की चुनौती उनके सामने बनी हुई है।
यही दमखम उन्हें आगामी चुनाव में दिखाना होगा। धर्मशाला रैली में वह सरकारी योजनाओं के हजारों लाभार्थियों को प्रधानमंत्री के सामने लाकर मिशन 2019 को लक्षित किए हैं। अब चारों सिटिंग सांसदों के एंटीइनकमबेंसी फैक्टर के बीच देखना यह होगा कि इस रैली में मोदी की हुंकार के बाद भाजपा का प्रचार कहां तक रफ्तार पकड़ता है।
46 से 50 हजार करोड़ हो गया कर्ज का आंकड़ा
जयराम सरकार के सत्ता संभालने से पहले ही हिमाचल पर लगभग 46,385 करोड़ रुपये का कर्ज चढ़ा हुआ था। इस पर 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा तो वार्षिक ब्याज ही देना था। अब यह 50 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा छू रहा है। अब करीब पांच हजार करोड़ रु पये तो सालाना ब्याज ही देना पड़ेगा। जयराम सरकार के एक साल में ऋण भी बड़ी चुनौती रहा है।
हालांकि, इस कर्जदारी के बीच सरकार इस बात को भी बार-बार दोहरा रही है कि वह एक साल में केंद्र से करीब 10 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं लाने में कामयाब रहे हैं। यानी केंद्र की इस बैसाखी का ही हिमाचल को सहारा है। इसलिए अगली लोकसभा भी हिमाचल के मनमाफि क होनी जरूरी है।
विपक्ष पर रैली से होगा पलटवार
राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत का असर हिमाचल में भी देखा जाने लगा है। विपक्षी कांग्रेस ने अपने तीखे तेवर अपना लिए हैं। जयराम सरकार के खिलाफ कांग्रेस आक्रामक मुद्रा मेें है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसे में कांग्रेस को करारा जवाब देने के मद्देनजर भी भाजपा के लिए धर्मशाला की यह रैली महत्वपूर्ण है।
क्षेत्रीय संतुलन साधना चाह रही सरकार
राजधानी शिमला और धर्मशाला प्रदेश के दो अलग-अलग छोरों पर स्थित हैं। खुद मुख्यमंत्री मंडी जिले से हैं जो मध्य हिमाचल में है। ऐसे में धर्मशाला में इस रैली का आयोजन करने के भी कई सियासी मायने हैं। सीएम इससे भी पूरे प्रदेश का संतुलन साधना चाह रहे हैं।
हाल ही में सरकार धर्मशाला के तपोवन में छह दिन के विधानसभा शीतकालीन सत्र का आयोजन कर शिमला लौटी है। अब इस रैली के बहाने सरकार का धर्मशाला का दूसरा प्रवास हो रहा है। हिमाचल में जो भी सरकारें बनी हैं, उनके गठन में राज्य के सबसे बड़े जिला कांगड़ा का ही अहम योगदान रहा है।