पी मित्रा को आरोपी बनाने पर ये विभाग लेगा फैसला
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हिमाचल भू-सुधार एवं मुजारियत अधिनियम की धारा-118 में कथित अवैध वसूली के मामले में पूर्व मुख्य सचिव पी मित्रा को आरोपी बनाना है कि नहीं, इस पर कार्मिक विभाग फैसला लेगा।
विजिलेंस की ओर से मित्रा को आरोपी बनाने के लिए एक चिट्ठी गृह विभाग को भेजी गई, जहां से यह आगे विधि विभाग को प्रेषित की गई। मामला मुख्य सचिव के ध्यान में भी लाया गया। अब मुख्य सचिव ने इसे कार्मिक विभाग को भेज दिया है और इस पर फै सला लेने को कहा है।
मुख्य सचिव बीके अग्रवाल ने मामले की फाइल कार्मिक विभाग को भेजने की पुष्टि की है। कसौली के एक रिजॉर्ट के लिए बाहरी व्यक्ति को धारा -118 की मंजूरी देने के मामले में अवैध वसूली के आरोपों में विजिलेंस ब्यूरो जांच कर रहा है।
नए विजिलेंस मैनुअल के अनुसार ये जरूरी
इस जांच में आरोपी बनाए बगैर कई बार तत्कालीन राजस्व सचिव रहे पी मित्रा से विजिलेंस पूछताछ कर चुका है, साथ ही पॉलीग्राफ टेस्ट की भी मांग की गई है। नए विजिलेंस मैनुअल के अनुसार विजिलेंस को किसी भी जांच से पहले सरकार की मंजूरी लेनी होती है।
इसी पर विजिलेंस ने सरकार को चिट्ठी लिखी है। मामला चेल्सी-ए-रिजॉर्ट कसौली की गैर हिमाचली को जमीन खरीद की मंजूरी देने से संबंधित है। वर्ष 2005-06 में इस क्षेत्र की कैरिंग कैपेसिटी कम मानकर इसकी मंजूरी नहीं मिली थी।
2009-10 में तत्कालीन राजस्व मंत्री ने तीन अनऑफिशियल (यूओ) नोट तक जारी किए। फि र उस वक्त के प्रधान सचिव राजस्व पी मित्रा ने फाइल आगे मंत्री को भेज दी, जिस पर मंजूरी दे दी गई।
बाद में मामला पी मित्रा की एक व्यवसायी से हुई रिकार्डेड बातचीत से खुला। विजिलेंस ब्यूरो व्यवसायी के वॉयस सैंपल और पॉलीग्राफ टेस्ट लेने की मंजूरी ले चुका है। अब मित्रा के सैंपल लेने को भी कोर्ट में अरजी दी गई है।