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Shimla News: लोग रह गए प्यासे, कागजों में कर दी पानी की सप्लाई
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खास
ठियोग उपमंडल में पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी के आरोपों पर एसडीएम ने ठेकेदारों के खिलाफ बैठाई जांच
पांच ठेकेदारों को सौंपा था टैंकरों से पानी बांटने का जिम्मा
गांवों में पहुंचा एक टैंकर, कागजों में दिखा दिए आठ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गर्मियों के मौसम में लोग प्यासे रह गए और कागजों में पानी बांट दिया गया। अब मामले की पूरी सच्चाई का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
शुरुआती जांच में पता चला है कि सप्लाई ऑफ ड्रिंकिंग वाटर थ्रू टैंकर योजना से पानी की आपूर्ति के लिए ठेकेदारों को 1.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। पानी की आपूर्ति के गड़बड़झाले का यह सनसनीखेज मामला जिले के ठियोग विधानसभा क्षेत्र का है। दरअसल उपमंडल ठियोग में इस साल गर्मियों के मौसम में पानी के लिए हाहाकार मच गया था। कई क्षेत्रों में पीने के पानी की दिक्कत तक आ गई थी। इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने जल शक्ति विभाग के माध्यम से फरवरी से जून 2024 के बीच सूखे से प्रभावित संधू, सरीन, मतियाना और फागू सहित उपमंडल के अधिकतर क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की थी। इसका काम करीब पांच ठेकेदारों को आवंटित किया था।
ग्रामीणों ने ठियोग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक के संज्ञान में लाया था कि पानी की सप्लाई में गड़बड़ियां हुई हैं। इसके बाद इस मामले की पूरी सच्चाई पता करने के लिए आरटीआई के माध्यम से सूचना ली गई। अब इसी आधार पर मामले की शिकायत एसडीएम से की है। आरोप लगे हैं कि गांवों में एक टैंकर आया जबकि कागजों में 7 से 8 टैंकर दिखाए गए। इसके साथ ही कागजों में एक दिन में 300 किलोमीटर तक टैंकर को चलता हुआ दिखाया है। एक दिन में टैंकर इतना कैसे चल सकता है? टैंकर के गाड़ियों के नंबर भी टैंकर के साथ मेल नहीं खा रहे। यह नंबर टैंकर के न होकर लोगों के निजी गाड़ियों के हैं। आरोप है कि कागजों के मुताबिक इतना पानी बांटा ही नहीं जबकि टैंकरों को कई किलोमीटर चलता दिखाया है। एसडीएम ठियोग मुकेश शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग के एक्सईएन को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एक्सईएन को मामले के हर पहलुओं की जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
ठियोग में हर साल टैंकरों से होती हैै सप्लाई : संदीप
माकपा की ठियोग लोकल कमेटी के सचिव संदीप ने प्रेसवार्ता में कहा कि ठियोग उपमंडल के अंदर गर्मियों में पीने का पानी टैंकरों से उपलब्ध करवाया जाता है। हर साल 10 से 12 लाख रुपये का पानी उपलब्ध करवाया जाता है लेकिन इस बार 1,13,10,370 रुपये का पानी उपलब्ध करवाया गया। इस आंकड़े से लगा कि घोटाला हुआ है। आरटीआई के माध्यम से इसकी सूचना ली तो सामने आया कि बहुत सारी गाड़ियां ऐसी हैं जो है ही नहीं। पानी के वितरण के लिए इस्तेमाल किए वाहनों के जो नंबर दिखाए हैं वह जीप, स्कूटर और निजी गाड़ियों के हैं। एक गाड़ी उद्यान विभाग के नाम से पंजीकृत है। कुछ पिकअप गाड़ियों ने रोजाना 819 से 250 किलोमीटर सफर तय कर पानी उपलब्ध करवाया है। टैंकर भी रोजाना 387 किलोमीटर चला दिखा है जो संभव नहीं है। पानी को सैंज खड्ड से लेलुपुल से उठाया दर्शाया है। ठियोग से सैंज तक लगातार चढ़ाई है। ऐसे में यह संभव नहीं है कि टैंकर एक दिन में इतना किलोमीटर चल पाए। जहां एक टैंकर पानी का भेजा वहां पर चार टैंकर दिखाए थे। कई जगह एक ही टैंकर के कई फेरे दिखाए हैं।
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ठियोग उपमंडल में पानी की आपूर्ति में गड़बड़ी के आरोपों पर एसडीएम ने ठेकेदारों के खिलाफ बैठाई जांच
पांच ठेकेदारों को सौंपा था टैंकरों से पानी बांटने का जिम्मा
गांवों में पहुंचा एक टैंकर, कागजों में दिखा दिए आठ
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गर्मियों के मौसम में लोग प्यासे रह गए और कागजों में पानी बांट दिया गया। अब मामले की पूरी सच्चाई का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा।
शुरुआती जांच में पता चला है कि सप्लाई ऑफ ड्रिंकिंग वाटर थ्रू टैंकर योजना से पानी की आपूर्ति के लिए ठेकेदारों को 1.13 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। पानी की आपूर्ति के गड़बड़झाले का यह सनसनीखेज मामला जिले के ठियोग विधानसभा क्षेत्र का है। दरअसल उपमंडल ठियोग में इस साल गर्मियों के मौसम में पानी के लिए हाहाकार मच गया था। कई क्षेत्रों में पीने के पानी की दिक्कत तक आ गई थी। इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने जल शक्ति विभाग के माध्यम से फरवरी से जून 2024 के बीच सूखे से प्रभावित संधू, सरीन, मतियाना और फागू सहित उपमंडल के अधिकतर क्षेत्रों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति की थी। इसका काम करीब पांच ठेकेदारों को आवंटित किया था।
ग्रामीणों ने ठियोग विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक के संज्ञान में लाया था कि पानी की सप्लाई में गड़बड़ियां हुई हैं। इसके बाद इस मामले की पूरी सच्चाई पता करने के लिए आरटीआई के माध्यम से सूचना ली गई। अब इसी आधार पर मामले की शिकायत एसडीएम से की है। आरोप लगे हैं कि गांवों में एक टैंकर आया जबकि कागजों में 7 से 8 टैंकर दिखाए गए। इसके साथ ही कागजों में एक दिन में 300 किलोमीटर तक टैंकर को चलता हुआ दिखाया है। एक दिन में टैंकर इतना कैसे चल सकता है? टैंकर के गाड़ियों के नंबर भी टैंकर के साथ मेल नहीं खा रहे। यह नंबर टैंकर के न होकर लोगों के निजी गाड़ियों के हैं। आरोप है कि कागजों के मुताबिक इतना पानी बांटा ही नहीं जबकि टैंकरों को कई किलोमीटर चलता दिखाया है। एसडीएम ठियोग मुकेश शर्मा ने बताया कि जल शक्ति विभाग के एक्सईएन को मामले की जांच के आदेश दिए हैं। एक्सईएन को मामले के हर पहलुओं की जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
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ठियोग में हर साल टैंकरों से होती हैै सप्लाई : संदीप
माकपा की ठियोग लोकल कमेटी के सचिव संदीप ने प्रेसवार्ता में कहा कि ठियोग उपमंडल के अंदर गर्मियों में पीने का पानी टैंकरों से उपलब्ध करवाया जाता है। हर साल 10 से 12 लाख रुपये का पानी उपलब्ध करवाया जाता है लेकिन इस बार 1,13,10,370 रुपये का पानी उपलब्ध करवाया गया। इस आंकड़े से लगा कि घोटाला हुआ है। आरटीआई के माध्यम से इसकी सूचना ली तो सामने आया कि बहुत सारी गाड़ियां ऐसी हैं जो है ही नहीं। पानी के वितरण के लिए इस्तेमाल किए वाहनों के जो नंबर दिखाए हैं वह जीप, स्कूटर और निजी गाड़ियों के हैं। एक गाड़ी उद्यान विभाग के नाम से पंजीकृत है। कुछ पिकअप गाड़ियों ने रोजाना 819 से 250 किलोमीटर सफर तय कर पानी उपलब्ध करवाया है। टैंकर भी रोजाना 387 किलोमीटर चला दिखा है जो संभव नहीं है। पानी को सैंज खड्ड से लेलुपुल से उठाया दर्शाया है। ठियोग से सैंज तक लगातार चढ़ाई है। ऐसे में यह संभव नहीं है कि टैंकर एक दिन में इतना किलोमीटर चल पाए। जहां एक टैंकर पानी का भेजा वहां पर चार टैंकर दिखाए थे। कई जगह एक ही टैंकर के कई फेरे दिखाए हैं।
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